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24 साल सेना में सेवा के बाद बालाघाट लौटे देवेन्द्र कटरे, शहर ने पलक-पांवड़े बिछाकर किया स्वागत

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Sep 03, 2026 08:15 pm / Post views : 118

24 साल सेना में सेवा के बाद बालाघाट लौटे देवेन्द्र कटरे, शहर ने पलक-पांवड़े बिछाकर किया स्वागत
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24 साल सेना में सेवा के बाद बालाघाट लौटे देवेन्द्र कटरे, शहर ने किया भव्य स्वागत

Balaghat  03 September 2026 बालाघाट यशो:-  देश की सीमाओं की रक्षा में 24 वर्षों तक समर्पित सेवा देने के बाद भारतीय थल सेना से सेवानिवृत्त होकर बालाघाट पहुंचे जिले के सपूत देवेन्द्र ‘बब्लू’ कटरे का गुरुवार को नगरवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके आगमन पर पूर्व सैनिकों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों और स्थानीय लोगों ने जगह-जगह आत्मीय अभिनंदन किया। राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत जयघोषों के बीच निकली उनकी शौर्य यात्रा ने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

[caption id="attachment_51150" align="aligncenter" width="300"]24 वर्ष की सैन्य सेवा के बाद बालाघाट पहुंचे देवेन्द्र कटरे का स्वागत 24 साल सेना में सेवा के बाद बालाघाट लौटे देवेन्द्र कटरे, शहर ने किया भव्य स्वागत[/caption]

रानी अवंतीबाई की प्रतिमा पर किया नमन

बालाघाट पहुंचने के बाद देवेन्द्र कटरे ने सर्वप्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं वीरांगना रानी अवंतीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। इसके बाद उनके सम्मान में भव्य शौर्य यात्रा निकाली गई। यात्रा में ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’, ‘जय जवान-जय किसान’ और ‘देखो-देखो कौन आया, भारत माता का लाल आया’ जैसे जयघोष गूंजते रहे।

शौर्य यात्रा भटेरा चौकी वार्ड क्रमांक-2 स्थित उनके निज निवास पहुंची। यहां स्थानीय नागरिकों और सहयोगियों ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और पुष्पवर्षा के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

जम्मू-कश्मीर से लेह-लद्दाख तक निभाई जिम्मेदारी

देवेन्द्र कटरे ने भारतीय थल सेना में अपने 24 वर्ष के सेवाकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख और नागालैंड सहित कई चुनौतीपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं दीं। उन्होंने महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में भी अपनी कर्तव्यनिष्ठा और प्रतिभा का परिचय दिया।

सैन्य सेवा के साथ ही देवेन्द्र कटरे का गीत-संगीत से भी विशेष लगाव रहा। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से सैन्य साथियों और सहयोगियों के बीच अलग पहचान बनाई। सेवा के दौरान गीत-संगीत के जरिए उन्होंने साथियों का मनोबल बढ़ाने और माहौल को खुशनुमा बनाने में भी योगदान दिया।

मंगेझरी से शुरू हुआ देशसेवा का सफर

वारासिवनी क्षेत्र के छोटे से गांव मंगेझरी से देशसेवा का सफर शुरू करने वाले देवेन्द्र ‘बब्लू’ कटरे ने अपने माता-पिता श्रीमती मीरा कटरे एवं मोहन लाल कटरे के संस्कारों और मार्गदर्शन से सेना में जाने का निर्णय लिया। उनके गौरवमयी सैन्य सफर में पत्नी श्रीमती निधि कटरे, छोटे भाई जैनेन्द्र कटरे एवं निक्की कटरे का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

‘सेना से सेवानिवृत्ति सेवा का अंत नहीं’

स्वागत से अभिभूत देवेन्द्र कटरे ने कहा कि भारतीय सेना में 24 वर्षों तक सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य और गौरव है। देश की सीमाओं पर कर्तव्य निभाते हुए अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन हर चुनौती के सामने तिरंगा और भारत माता का गौरव सर्वोपरि रहा।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद अपने जिले की माटी पर जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उनका स्वागत हुआ, उससे वे अभिभूत हैं। उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार, सैन्य अधिकारियों, साथी जवानों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेना से सेवानिवृत्ति उनके लिए सेवा का अंत नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नए दायित्व की शुरुआत है।

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