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धर्मविचारसिवनी

good morning thoughts : दूसरों की अपेक्षाएं

  दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा किया जाना सम्भव नहीं है, नामुमकिन है, आज तक कोई किसी की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा।


अनावश्यक रूप से दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करने के चक्कर में आदमी स्वयं के जीवन से बहुत दूर हो जाता है। स्वयं के जीवन से चूक जाता है, जीवन से चूक स्वयं से ही चूक है, स्वयं से चूक आदमी को विषादग्रस्तता में धकेलती है । जिसे स्वयं से प्रेम नहीं, जो स्वयं से परिचित नहीं, जिसे स्वयं का सम्मान नहीं है, वही दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करने के चक्कर में पड़ कर स्वयं को अशांत करता है। अशांत चित्त जीवन को नर्क बना डालता है।

Dainikyashonnati

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