होलिका दहन 2026 भद्रा पुच्छ मुहूर्त 2 मार्च को
रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक धुरेड़ी रंगोत्सव 4 मार्च की प्रातः से
होलिका दहन 2026 भद्रा पुच्छ मुहूर्त
Seoni 01 March 2026
होलिका दहन 2 मार्च को भद्रा पुच्छ में
रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक
धुरेड़ी रंगोत्सव 4 मार्च की प्रातः से
पंडित राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा

सिवनी यशो:- सनातन धर्म को व्रत-त्योहारों का धर्म कहा गया है, जहाँ वर्ष भर किसी न किसी पर्व के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता रहता है। इसी परंपरा में फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला होली पर्व सनातन धर्म के प्रमुख और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है।
पूर्णिमा तिथि की रात्रि में होलिका दहन किया जाता है तथा चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को धुरेड़ी पर्व मनाया जाता है, जिसमें परस्पर रंग लगाकर बुराई, द्वेष और वैमनस्यता का परित्याग किया जाता है। यही कारण है कि इसे रंगों का पर्व कहा जाता है। इसे ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का पर्व भी माना जाता है, इसी कारण कहा जाता है — ‘बुरा न मानो, होली है।’
होलिका दहन 2026 भद्रा पुच्छ मुहूर्त – शास्त्रीय नियम
होलिका दहन के लिए तीन नियम अनिवार्य हैं — फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि, रात्रि काल तथा भद्रा का समाप्त होना। 2 मार्च 2026 को चतुर्दशी तिथि सायं 5:25 बजे तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा प्रारंभ होगी जो 3 मार्च सायं 4:40 बजे तक रहेगी।
प्रदोष व्यापिनी ग्राह्य पौर्णिमा फाल्गुनी सदा।
तस्यां भद्रा मुखं व्यक्त्वा पूज्या होला निशा मुखे॥
शास्त्रानुसार भद्रा मुख को त्याग कर भद्रा पुच्छ में रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट के मध्य होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण एवं प्रतिपदा तिथि होने के कारण होलिका दहन नहीं होगा।
चंद्र ग्रहण विवरण
3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। सिवनी में ग्रहण का स्पर्श 6:14 बजे, मध्य 6:39 बजे तथा मोक्ष 7:02 बजे होगा। कुल अवधि 48 मिनट रहेगी।
सूतक काल के नियम
सूतक काल में भोजन, शयन, मूर्ति पूजन वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए। ग्रहण पूर्व स्नान, मध्य में जप-हवन तथा ग्रहण पश्चात दान व स्नान करना शास्त्रसम्मत बताया गया है।
ग्रहण फल
मेष— चिंता | वृष— व्यथा | मिथुन— धन लाभ | कर्क— शत्रु भय | सिंह— घात | कन्या— हानि | तुला— लाभ | कुंभ— पीड़ा | मीन— सुख-शांति



