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विस्थापन नहीं, लूटखसोट, जोगीवाड़ा में वन दोहन का बड़ा घोटाला चर्चा में

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Nov 22, 2025 11:39 pm / Post views : 813

विस्थापन नहीं, लूटखसोट, जोगीवाड़ा में वन दोहन का बड़ा घोटाला चर्चा में
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पेंच कोर एरिया के विस्थापन कार्य में बड़ा भ्रष्टाचार!

सिवनी यशो:- पेंच नेशनल पार्क के कोर एरिया में स्थित ग्राम कर्माझिरी को वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन की दृष्टि से स्थानांतरित करने का शासन द्वारा निर्णय लिया गया है। इसके लिए ग्राम जोगीवाड़ा के वन विभाग कक्ष क्रमांक आर/436 एवं आर/437 के कुल 197 हेक्टेयर क्षेत्र को ‘न्यू कर्माझिरी’ नामक नई बसाहट के रूप में चयनित किया गया है।

[caption id="attachment_37805" align="alignleft" width="225"]सिवनी उत्पादन वन मंडल द्वारा की गई वृक्ष कटाई का दृश्य, जमीन पर पड़े सागौन और बांस के अवशेष। न्यू कर्माझिरी बसाहट के नाम पर हजारों वृक्षों की कटाई,[/caption]

बसाहट तैयार करने के नाम पर वन क्षेत्र को मैदानी स्वरूप देने की प्रक्रिया में जिस तरह से वन संपदा का विदोहन हुआ, वह केवल विस्थापन प्रक्रिया नहीं बल्कि “भ्रष्टाचार का घोटाला” साबित हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, दक्षिण वन मंडल सिवनी और उत्पादन वन मंडल सिवनी ने इस विदोहन कार्य को अंजाम दिया, परंतु इस पूरे प्रकरण में अनियमितताएँ, मशीनों से कटाई, अवैध इंधन लकड़ी की बिक्री, और मार्किंग घोटाला सामने आया है।

 कैसे हुआ घोटाला? प्रमुख तथ्य सामने आए—

🔹 14,000 वृक्ष काटे गए, जबकि मार्किंग में बताया गया कि केवल उतने ही पेड़ हैं, जबकि सूत्रों के अनुसार 20,000 से अधिक वृक्ष मौजूद थे।
🔹 मजदूरों से कटाई कराई जानी थी, परंतु मशीनों और हैवी कटिंग मशीनों से वृक्षों का विदोहन कराया गया।
🔹 जलाऊ लकड़ी, सागौन एवं बांस की भारी मात्रा ईंट भट्टों, व्यापारी और निजी व्यक्तियों को बिना मापदंड के ट्रालियों में भर-भरकर बेची गई।
🔹 इस कार्य में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने मनमानी रेट पर बिक्री कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया।
🔹 कहा जा रहा है कि मार्किंग, परिवहन, सागौन प्लांटेशन, सड़क निर्माण और प्लॉटिंग के नाम पर पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

[caption id="attachment_37807" align="alignright" width="300"]कटे हुए सागौन और जलाऊ लकड़ी के लट्ठों का ढेर, पास में खड़ी ट्राली और मजदूर। न्यू कर्माझिरी बसाहट के नाम पर हजारों वृक्षों की कटाई,[/caption]

 “विस्थापन” के बहाने खुला ‘वन दोहन का कारोबार’

दक्षिण वन मंडल एवं उत्पादन वन मंडल के अधिकारियों ने बसाहट विकास के नाम पर, शासन से मिले अधिकारों का दुरुपयोग कर वन संपदा को लूट के माल में बदल दिया।
पर्यावरण संरक्षण के नाम पर शुरू हुई प्रक्रिया, अब आर्थिक शोषण, वन संपदा की लूट और राजस्व घोटाले में बदलती दिखाई दे रही है।

 सूत्रों का दावा

“मार्किंग प्रक्रिया में ही भारी हेराफेरी की गई। वास्तविक वृक्षों की संख्या को कम दिखाया गया। कटाई के बाद जलाऊ लकड़ी और बांस को खुलेआम निजी व्यापारियों को बेच दिया गया। ट्रालियों में मनमानी तरीके से लकड़ी ले जाने की छूट दी गई, न मापदंड थे, न परिवहन रजिस्ट्रेशन।”

 अब क्या होगा?

इस पूरे मामले में यदि स्वतंत्र जांच कराई जाए, तो सामने आएगा कि:
 कितना सरकारी राजस्व नुकसान हुआ?
 कितनी लकड़ी का आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है?
 किन व्यक्तियों और कारोबारियों को लाभ पहुंचाया गया?
 किन अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिम्मेदारी तय होगी?

 क्या कहते हैं पर्यावरण विशेषज्ञ?

पर्यावरणविद् बताते हैं कि

➡ “विस्थापन विकास, पर्यावरण बचाव का कदम है,

लेकिन यदि प्रक्रिया भ्रष्टाचार में ढल जाए तो यह जंगल, पारिस्थितिकी और सरकारी संपदा का सबसे बड़ा नुकसान है।

https://www.gondwanasamay.com/2019/03/blog-post_95.html

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