6 अगस्त से जारी इस आंदोलन में अधिकारियों ने शासकीय वाहनों की चाबी कलेक्टोरेट में जमा कर दी है और दफ्तरों में बिना किसी कार्य के मौजूद रह रहे हैं।
विरोध के चलते नामांतरण, सीमांकन, फौती नामांतरण, मूल निवासी, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र सहित सैकड़ों मामलों की सुनवाई और दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया रुक गई है।
कई कोर्ट केस की पेशियों की तारीख भी आगे बढ़ा दी गई है।
पिछले दो दिनों की सरकारी छुट्टियों के बाद सोमवार को स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हालांकि, प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और राजस्व अधिकारियों के बीच हुई बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
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संवर्ग का आरोप है कि शासन ने पहले तीन माह तक केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में योजना लागू करने, न्यायालयों का विलय न करने और गैर-न्यायिक अधिकारियों को संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था ।
लेकिन इसके विपरीत योजना 9 और जिलों में लागू कर दी गई और आवश्यक संसाधन नहीं दिए गए।
संवर्ग के विरोध को पटवारी, सरपंच और पंचायत सचिव संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। मप्र पंचायत सचिव संगठन ने तहसीलदारों–नायब तहसीलदारों की सभी मांगों का समर्थन करते हुए इसे न्यायसंगत बताया है।
सिवनी में केसों की तारीख बढ़ाई गई
सिवनी में भी आंदोलन का असर साफ दिख रहा है। यहां तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने अपनी गाड़ियों की चाबियां कलेक्टोरेट में जमा कर दी हैं।
कई मामलों में पेशियों की तारीख आगे खिसकाई गई है, जिससे आम जनता के काम अटक गए हैं।
संघ ने शासन से मांग की है कि विभाजन योजना को तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से पुनः शुरू हो सकें।
जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों समस्या बता चुके
इस संबंध में राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ ने पिछले दिनों सिवनी विधायक दिनेश राय को अपनी मांगो के निराकरण के लिये ज्ञापन भी सौंपा है तथा अपने वरिष्ठ अधिकारियों को को अपनी समस्याओं से अवगत करा चुके हैं।हमारे अपडेट के लिए जुड़ें:
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