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10 उपवास करने वालों का पारणा महोत्सव संपन्न, प्रभु की विशाल रथयात्रा निकली

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Sep 07, 2025 08:51 pm / Post views : 474

10 उपवास करने वालों का पारणा महोत्सव संपन्न, प्रभु की विशाल रथयात्रा निकली
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Seoni, 07 September 2025

सिवनी यशो:- श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर सिवनी (म.प्र.) में रविवार को धार्मिक उल्लास और भक्ति भाव से ओत-प्रोत वातावरण रहा। महासमाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज सिवनी में विश्व के प्रथम 108 चरण चिन्ह की प्रतिष्ठा, मुनि श्री भावसागर जी महाराज की आंखों में छलक पड़े आंसू से दीक्षित एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज और मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सानिध्य में तथा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त योगाचार्य के निर्देशन में अनेक मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न हुईं।

उपवास पारणा महोत्सव व सम्मान

इस अवसर पर 10 उपवास करने वाले श्रद्धालुओं का पारणा महोत्सव सम्पन्न हुआ

और सभी का सम्मान किया गया।

इसके अलावा, उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे आत्मिक ऊर्जा और भक्ति का अद्वितीय अवसर बताया।

प्रभु की रथयात्रा में उमड़ा जनसैलाब

प्रभु की विशाल रथयात्रा श्री पारसनाथ बड़ा मंदिर से प्रारंभ होकर पुनः मंदिर प्रांगण में पहुंची।

इसी दौरान मंदिर समिति, पाठशाला सदस्य, साधु सेवा समिति, चातुर्मास समिति, नवयुवक मंडल, महिला मंडल और बालिका मंडल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

वहीं, रास्ते भर जगह-जगह प्रभु को श्रीफल अर्पित किए गए,

आरती उतारी गई और मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया गया।

परिणामस्वरूप वातावरण में भक्ति और उल्लास का अनोखा संगम दिखाई दिया।

श्रद्धालु केसरिया, पीले और सफेद वस्त्रों में भक्ति नृत्य करते हुए चल रहे थे।

[caption id="attachment_34701" align="alignleft" width="300"]जैन रथयात्रा पारणा महोत्सव सिवनी 10 उपवास करने वालों का पारणा महोत्सव संपन्न, प्रभु की विशाल रथयात्रा निकली[/caption]

मुनि श्री भावसागर जी महाराज का संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा –

  • “रथयात्रा के माध्यम से आनंद मनाया जाता है, तीन लोक के नाथ आपके घर के सामने आते हैं, इंद्र भी नृत्य करते हैं।”

  • “जो शोभायात्रा में कंधा लगाता है या लुटाता है, उसे सर्वश्रेष्ठ सुख प्राप्त होता है।”

  • “रथयात्रा धर्मतीर्थ के नायक प्रभु की धर्मदेशना का प्रतीक है, जिससे असंख्य जीव आत्मबोध को प्राप्त करते हैं।”

अतः मुनि श्री ने स्पष्ट किया कि चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा के समय भी सैकड़ों रथों में प्रतिमा रखकर छह खंडों की परिक्रमा की जाती थी।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

उन्होंने कहा कि धर्म प्रभावना के लिए रथोत्सव किया जाता है। साथ ही, जिन्होंने 10 उपवास किए हैं, वे मानो चतुर्थ काल के एक हज़ार वर्षों के बराबर पुण्य संचय कर लेते हैं। इस प्रकार, यह आयोजन आत्मशुद्धि और धर्मभावना को प्रगाढ़ करने वाला सिद्ध होता है।

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