रेत के कारोबार पर किसका राज? उगली से कन्हरगांव तक उत्खनन के आरोप, शिकायतों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल!
पिछले वर्ष उगली में गोलीबारी में जा चुकी है एक व्यक्ति की जान, रेत के कारोबार को लेकर संघर्ष और दहशत की शिकायतें; हिर्री नदी के किनारे सरकारी-निजी भूमि से उत्खनन की शिकायत पर भी कार्रवाई का इंतजार
सिवनी में रेत उत्खनन पर सवाल, उगली से कन्हरगांव तक शिकायतें
Seoni 10 October 2026
सिवनी /केवलारी/बरघाट यशो:- जिले में रेत उत्खनन और परिवहन का मामला अब केवल खनिज संपदा तथा सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं रह गया है। उगली से लेकर बरघाट तहसील के कन्हरगांव तक सामने आई शिकायतों ने विभागीय निगरानी, प्रशासनिक कार्रवाई और रेत के कारोबार से जुड़े विवादों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उगली क्षेत्र के नालों से रेत निकालने और विभिन्न स्थानों पर डंप किए जाने की शिकायतें हैं, तो दूसरी ओर कन्हरगांव में हिर्री नदी के समीप सरकारी और निजी भूमि से रेत निकाले जाने का मामला अधिकारियों तक पहुंचाया गया है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि रेत के कारोबार से जुड़े विवादों में हिंसा की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले वर्ष उगली क्षेत्र में गोलीबारी के दौरान एक व्यक्ति की मौत होने की घटना इस बात की याद दिलाती है कि ऐसे विवादों को समय रहते गंभीरता से लेना कितना जरूरी है। यदि रेत के उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी निगरानी नहीं होगी, तो राजस्व संबंधी अनियमितताओं के साथ कानून-व्यवस्था की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
अब सवाल सीधा है—जिले में रेत उत्खनन की निगरानी कौन कर रहा है और शिकायतों के बाद कार्रवाई का परिणाम जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?
उगली में नालों से रेत और डंप खाली होने की चर्चाएं, जांच कब होगी?
केवलारी तहसील के उगली क्षेत्र में विभिन्न नालों से रेत निकाले जाने, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से परिवहन और अलग-अलग स्थानों पर रेत जमा किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में कुछ डंप खाली किए जाने की चर्चाओं ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है।
स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि बड़कुल नाले सहित संबंधित नालों और रेत भंडारण स्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। खनिज, राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम यदि मौके पर पहुंचकर नालों की स्थिति, उत्खनन के निशान, डंप में उपलब्ध रेत की मात्रा तथा परिवहन और रॉयल्टी से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करती है, तो कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
यदि रेत वैध स्रोतों से लाई गई है, तो दस्तावेजों से इसकी पुष्टि होनी चाहिए। वहीं, यदि निर्धारित खदानों के अतिरिक्त अन्य स्थानों से बिना वैध अनुमति रेत निकाले जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
डंप खाली होने की चर्चाओं के बीच मौके की स्थिति समय रहते दर्ज करना भी जरूरी है, ताकि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों का सही तरीके से परीक्षण किया जा सके।
कन्हरगांव में सरकारी और निजी भूमि से रेत निकालने की शिकायत
बरघाट तहसील के ग्राम कन्हरगांव में हिर्री नदी के समीप स्थित सरकारी और निजी भूमि से रेत निकाले जाने का मामला भी सामने आया है। ग्रामीण नौशाद खान ने 5 अक्टूबर 2026 को जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, खनिज अधिकारी, बरघाट एसडीएम, तहसीलदार और थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर जांच तथा कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, सरकारी भूमि के खसरा नंबर 623 तथा निजी भूमि के खसरा नंबर 622 और 557 से ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत निकाले जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस संबंध में कुछ व्यक्तियों के नाम भी अधिकारियों को सौंपे गए आवेदन में उल्लेखित किए हैं।
नौशाद खान का कहना है कि वह पहले भी संबंधित अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दे चुके हैं, लेकिन उनके अनुसार समस्या पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। उन्होंने संबंधित भूमि का भौतिक सत्यापन कर रेत के स्रोत, उत्खनन की अनुमति, परिवहन दस्तावेजों और लागू रॉयल्टी संबंधी प्रावधानों की जांच कराने की मांग की है।
अब प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया गया या नहीं और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर उत्खनन की स्थिति क्या पाई गई। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच से होना आवश्यक है।
निर्धारित खदानों के बाहर भी हो रहा है उत्खनन? निगरानी पर सवाल
रेत उत्खनन से जुड़े विवादों में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या निर्धारित खदानों से रेत निकालने के साथ नदी और नालों के दूसरे स्थानों पर भी उत्खनन हो रहा है? यदि ऐसा है, तो संबंधित स्थलों की पहचान और अनुमति की स्थिति का सत्यापन जरूरी है।
रेत का वैध उत्खनन कहां से हो सकता है, कितनी मात्रा में किया जा सकता है और परिवहन के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता है—इन सभी बिंदुओं पर खनिज विभाग के रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर विभागीय निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में खनिज विभाग को शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
रेत के कारोबार पर संरक्षण के आरोपों का जवाब केवल बयान से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के रिकॉर्ड से मिल सकता है।
रेत के लिए संघर्ष, गोलीबारी और ग्रामीणों में दहशत की चिंता
रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर विवाद बढ़ने पर उसका असर आसपास के गांवों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। उगली क्षेत्र में पिछले वर्ष गोलीबारी के दौरान एक व्यक्ति की मौत की घटना इस विषय को गंभीर बनाती है। हालांकि, उस घटना के पूरे घटनाक्रम और रेत उत्खनन से उसके संबंध का विवरण पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट किया जाना चाहिए।
क्षेत्र में रेत के कारोबार को लेकर टकराव, दबाव और धमकी की शिकायतें यदि सामने आती हैं, तो पुलिस तथा प्रशासन को उनका तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। किसी भी ग्रामीण को अपनी जमीन, रास्ते या प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामले में शिकायत करने के कारण भयभीत होकर चुप रहने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
यदि खदानों या उत्खनन स्थलों के आसपास दहशत का माहौल होने की शिकायतें हैं, तो पुलिस को संवेदनशील स्थानों की निगरानी, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और विवादों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
रेत के कारोबार पर नियंत्रण का प्रश्न केवल खनिज विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। अवैध उत्खनन की जांच, राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन, परिवहन की निगरानी और हिंसा की आशंका पर कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।
प्रशासन और खनिज विभाग से सीधे सवाल
उगली और कन्हरगांव के मामलों के बाद प्रशासन को इन सवालों का जवाब देना चाहिए—
- उगली क्षेत्र के बड़कुल नाले सहित अन्य संबंधित नालों का भौतिक सत्यापन कब कराया जाएगा?
- कन्हरगांव में खसरा नंबर 623, 622 और 557 की भूमि पर उत्खनन की अनुमति तथा वास्तविक स्थिति की जांच हुई या नहीं?
- 5 अक्टूबर 2026 को दी गई शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
- निर्धारित खदानों के बाहर रेत निकाले जाने की शिकायतों की जांच कौन कर रहा है?
- संबंधित डंपों में जमा रेत के स्रोत, परिवहन दस्तावेजों और रॉयल्टी संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर हुआ है?
- उगली में पिछले वर्ष हुई घातक गोलीबारी के बाद रेत कारोबार से जुड़े विवादों की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए गए?
- क्या खनिज, राजस्व और वन विभाग संयुक्त निरीक्षण कर जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करेंगे?
- यदि जांच में अवैध उत्खनन, विभागीय लापरवाही या किसी प्रकार की मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
इन सवालों पर आधिकारिक जवाब और मौके की जांच के निष्कर्ष सामने आना आवश्यक है। इससे शिकायतों की वास्तविकता स्पष्ट होगी और किसी व्यक्ति या विभाग के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का परीक्षण भी प्रमाणों के आधार पर हो सकेगा।
अब कागजी शिकायतों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की जरूरत
उगली और कन्हरगांव के मामले प्रशासन के सामने एक स्पष्ट चुनौती रखते हैं। यदि रेत का उत्खनन नियमानुसार हो रहा है, तो दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन से इसकी पुष्टि होनी चाहिए। यदि निर्धारित स्थलों के बाहर बिना वैध अनुमति उत्खनन हो रहा है, तो उसे रोकने के लिए समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
प्रशासन को चाहिए कि संबंधित नालों, नदी किनारे की भूमि और रेत डंपों का संयुक्त निरीक्षण कराए। भूमि के खसरा रिकॉर्ड, उत्खनन की अनुमति, परिवहन दस्तावेज और उपलब्ध रेत की मात्रा का मिलान किया जाए। साथ ही, रेत के कारोबार से जुड़े विवादों में हिंसा या धमकी की शिकायतों पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे।
सिवनी में रेत के कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान अब केवल आश्वासन से नहीं होगा। उगली में जानलेवा गोलीबारी की घटना और कन्हरगांव में सरकारी-निजी भूमि से रेत निकालने की शिकायत—दोनों प्रशासन से जवाबदेही की मांग करते हैं। जरूरत इस बात की है कि जांच निष्पक्ष हो, कार्रवाई दिखाई दे और रेत के उत्खनन से लेकर परिवहन तक हर स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
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