आत्मरक्षा के गुर सीख सशक्त बन रहीं कुरई की बेटियां
अपराजिता’ अभियान के तहत मास्टर निकेश पदमाकर दे रहे 15 दिवसीय मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षण
कुरई/सिवनी यशो :- बदलते समय में बालिकाओं को आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाने की दिशा में कुरई विकासखंड में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। ‘अपराजिता कार्यक्रम’ के अंतर्गत बालिकाओं के लिए 15 दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में बालिकाएं मार्शल आर्ट्स और आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकें सीखकर न केवल अपनी सुरक्षा के गुर सीख रही हैं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए भी तैयार हो रही हैं।
यह प्रशिक्षण बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग तथा खेल और युवा कल्याण विभाग के समन्वय से आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों में बालिकाओं को आत्मरक्षा की तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया जा रहा है।
आत्मविश्वास के साथ सीख रहीं सुरक्षा के गुर
प्रशिक्षण के दौरान बालिकाओं को विभिन्न आत्मरक्षा तकनीकों के साथ सतर्कता, आत्मविश्वास और त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व की जानकारी दी जा रही है। नियमित अभ्यास के माध्यम से बालिकाओं को यह सिखाया जा रहा है कि किसी विपरीत परिस्थिति में घबराने के बजाय सूझबूझ और आत्मविश्वास के साथ अपनी सुरक्षा कैसे की जाए।
15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बालिकाएं नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। प्रशिक्षण में सहभागी बालिकाओं को प्रतिदिन बिस्किट का वितरण भी किया जा रहा है।
मास्टर निकेश पदमाकर दे रहे प्रशिक्षण
प्रशिक्षण का संचालन मार्शल आर्ट्स एक्सपर्ट मास्टर निकेश पदमाकर द्वारा किया जा रहा है। वे इंटरनेशनल जज एवं रेफरी (WAKO) तथा नेशनल सर्टिफाइड किकबॉक्सिंग कोच हैं। मास्टर निकेश पदमाकर मध्यप्रदेश के प्रथम थाई बॉक्सिंग ब्लैक बेल्ट होने के साथ 4th डान कराटे एवं 4th डान किकबॉक्सिंग भी हैं।
उनके मार्गदर्शन में बालिकाओं को मार्शल आर्ट्स एवं आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य बालिकाओं को केवल शारीरिक रूप से सक्षम बनाना ही नहीं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, जागरूकता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करना भी है।
‘सशक्त बेटी, सुरक्षित बेटी’ का संदेश
‘अपराजिता’ अभियान के माध्यम से बालिकाओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आत्मरक्षा प्रशिक्षण जैसी पहल बालिकाओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा के प्रति सजग बनाने के साथ उन्हें चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक एवं शारीरिक रूप से तैयार करती है।
‘सशक्त बेटी, सुरक्षित बेटी’ की भावना के साथ संचालित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बालिकाओं के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है।



