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“सड़क घोटाले में ईमानदार अफसर का ट्रांसफर, भ्रष्टाचारियों का प्रमोशन – सिवनी में सिस्टम नंगा”

सिवनी सड़क घोटाले से जुड़ी निर्माण स्थल की तस्वीर"11 और 9 करोड़ की सड़क परियोजनाएं बनीं भ्रष्टाचार का कॉरिडोर

Seoni 22 June 2025

सिवनी यशो “सड़कें जनता के लिए नहीं, ठेकेदारों और अफसरों की साझी लूट का जरिया बन गई हैं!”
डोभ – खरसारू और केवलारी – उगली सड़कें बनीं भ्रष्टाचार का मॉडल
सिवनी जिले की दो बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजनाएं – डोभ-खरसारू (11 करोड़) और केवलारी-उगली (9 करोड़) – अब जनता के लिए राहत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के गड्ढे साबित हो रही हैं।

इन निर्माणों में ठेकेदारों और अफसरों की मिलीभगत से गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही की खुली हत्या की गई है।

यह भी पढ़ें- <फर्जीवाड़ा खुलासा: नजूल भूमि पर कैसे हो गया नामांतरण और कैसे दे दी गई लीज?

h3>पहली ही बारिश में उखड़ी सड़कों की परतें, खुल गई पोल

16 जून की पहली बारिश में ही डोभ में बनी सीमेंट रोड की ऊपरी सतह उखडऩे लगी। मलारा-डोभ की पुलिया की एप्रोच रोड फट गई और खरसारू के पास की साइड वॉल्स में दरारें आ गईं।

यह साफ संकेत था कि निर्माण महज़ दिखावा था — बजरी, सीमेंट और मोरम के नाम पर लूट का खेल खेला गया।

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नकली मिक्स प्लांट, फर्जी फिनिशिंग, घटिया मटेरियल का घालमेल
एम-30 ग्रेड की जगह एम-10 ग्रेड का पेवर ब्लॉक, आरसीसी की जगह पत्थर और मुरम से भरी पुलिया, बेंच मिक्सर की जगह क्रेशर डस्ट और लोकल मटेरियल

बगैर तकनीकी स्वीकृति के भी भुगतान

लैब रिपोर्ट में मजबूती 200 प्रतिशत तक कम पाई गई, फिर भी अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं।

ईमानदार एसडीओ चौकसे ने किया खुलासा, ठेकेदार ने करवाया ट्रांसफर!
एसडीओ शिवशंकर चौकसे ने निर्माण स्थल पर निरीक्षण कर 26 लाख की रिकवरी निकाली, घटिया निर्माण पर आपत्ति दर्ज की।

परिणाम ठेकेदार ने मंत्री व सांसद से सेटिंग कर उन्हें तुरंत हटा दिया गया। ऐसा दंभ ठेकेदार ही भर रहे है और विभागीय अधिकारियों पर धौंस जमा रहे है ।

चौकसे का बयान:

“मैंने मिक्स प्लांट की फर्जी जानकारी और घटिया सामग्री की रिपोर्ट दी, तो मुझे ट्रांसफर कर दिया गया।”

फोटोशॉप से मिक्स प्लांट, और घोटाले के दस्तावेज तैयार

ठेकेदार ने फील्ड में मिक्स प्लांट न लगाकर फर्जी फोटोज और दस्तावेज से निर्माण पूरा दिखा दिया। एसडीओ ने माप पुस्तिका में इसकी साफ टिप्पणी दी थी, लेकिन रिकॉर्ड में हेराफेरी कर उसे भी दबा दिया गया।

ईमानदारी हटाओ – भ्रष्टाचार लाओ मॉडल लागू!

एसडीओ चौकसे को हटाकर, उनके स्थान पर भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे सब इंजीनियर चौबे को चार्ज सौंप दिया गया। चौबे अब पुराने रिकॉर्ड में बदलाव कर ठेकेदार को क्लीन चिट देने की कोशिश कर रहे हैं।

जनता की शिकायतें नहीं सुनी गईं – नंबर्स ब्लॉक, कॉल्स इग्नोर

जिन स्थानीय नागरिकों ने इस घोटाले की शिकायत करनी चाही, उनके नंबर संबंधित अधिकारियों द्वारा ब्लॉक कर दिए गए। यह सरकारी तंत्र की चुप्पी नहीं, भ्रष्टाचार की साझी रणनीति है।

जनप्रतिनिधियों की नाराजगी – जाँच और कार्रवाई की माँग
सिवनी विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन ने कहा:

“केवलारी–उगली मार्ग बिना स्वीकृति शुरू हुआ, गुणवत्ता शून्य है और ठेकेदारों को भुगतान भी कर दिया गया!”

केवलारी विधायक ठा. रजनीश सिंह ने कहा:

“डोभ-खरसारू रोड जनता की वर्षों पुरानी मांग थी, लेकिन अब उसमें भी लूट मच गई है। शासन आँख मूंदे बैठा है।”

दोनों विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, दोषियों पर FIR और ठेकेदारों की ब्लैकलिस्टिंग की माँग की है।

यह सड़क नहीं, सिस्टम की दरार है!

यह प्रकरण सिर्फ सड़क की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट, ईमानदारी की हत्या और सरकारी चुप्पी का बड़ा घोटाला है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का शासन और सिस्टम दोनों से विश्वास उठ जाएगा।

Dainikyashonnati

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