भैरोगंज वार्ड, सिवनी का मामला – एसडीएम न्यायालय में पहुंचा प्रकरण
Seoni 10 June 2025
सिवनी यशो:- राजस्व विभाग में सरकारी जमीनों के फर्जीवाड़े का यह एक और उदाहरण सामने आया है। उपनगरीय क्षेत्र भैरोगंज वार्ड स्थित बघेल मोहल्ला में दशकों पुरानी नजूल भूमि को न सिर्फ अवैध रूप से निजी नाम पर दर्ज कर दिया गया, बल्कि उसे व्यावसायिक प्रयोजन के लिए लीज पर भी दे दिया गया। इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की मिलीभगत और तथाकथित समिति की भूमिका सवालों के घेरे में है।
किसकी थी जमीन?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ब्लॉक नंबर 11 एवं 14 में स्थित नजूल भूमि सरस्वती बाई धर्मदास बैरागी के नाम पर दर्ज थी। उनके न तो कोई उत्तराधिकारी थे, न ही किसी को भूमि दान की गई थी। ऐसे में नियमों के अनुसार यह भूमि शासन की होनी थी। लेकिन यह भूमि बाद में मुनियाबाई एडवोकेट एसएन शील के नाम कैसे दर्ज हो गई, यह अब तक रहस्य बना हुआ है।
समिति ने दे दी लीज, स्कूल और मंदिर बने
तथाकथित समिति ने इस नजूल भूमि को बाबूलाल यादव नामक व्यक्ति को व्यावसायिक उपयोग हेतु 10 वर्षों के लिए लीज पर दे दिया। ब्लॉक 11 के प्लॉट 05 एवं 06 में एसजीएम प्राइवेट स्कूल और श्रीराम मंदिर, तथा ब्लॉक 14 के प्लॉट 60 एवं 65 में मॉर्निंग प्ले वाटिका स्कूल का संचालन हो रहा है, वह भी बिना किसी वैध अनुमति के।
शिकायत के बाद रुका निर्माण
स्थानीय नागरिकों द्वारा जब प्राइवेट स्कूल के निर्माण से रास्ता बंद करने की शिकायत की गई, तो जिला कलेक्टर ने तत्काल तहसीलदार मीना दसारिये एवं नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ रामकुमार कुर्वेति को निरीक्षण हेतु भेजा। जांच में निर्माण कार्य को बिना अनुमति पाया गया और नोटिस जारी कर काम पर रोक लगा दी गई।
तहसीलदार ने माना ‘विवादितÓ
प्रकरण पर न्यायालय तहसीलदार द्वारा सुनवाई करते हुए भूमि को सार्वजनिक एवं विवादित करार दिया गया। इसके बावजूद कथित समिति द्वारा नामांतरण के प्रयास जारी हैं।
एसडीएम न्यायालय की नजर
अब यह मामला एसडीएम न्यायालय, सिवनी में पहुंच गया है। जनता की नजरें एसडीएम सुश्री मेघा शर्मा पर टिकी हैं – क्या वे इस मामले में निष्पक्ष जांच कर फर्जी नामांतरण पर रोक लगाएंगी या फिर यह मामला भी राजस्व विभाग की अन्य अनियमितताओं की तरह फाइलों में दब जाएगा?
यह प्रकरण केवल एक भूमि विवाद नहीं है, बल्कि यह राजस्व व्यवस्था की उस गहरी खामी को उजागर करता है, जिसमें अफसरों की मिलीभगत से नजूल जैसी सरकारी जमीनें भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे निजी लोगों को सौंप दी जाती हैं। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और न्यायालय इस पर क्या कदम उठाते हैं।



