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मध्यप्रदेशसिवनी

 शासकीय भूमि पर रसूखदारों का कब्जा! प्रशासन मौन, डुगरिया की बेशकीमती जमीन खतरे में

आदिवासी क्षेत्र में बढ़ रहे अवैध निर्माण, राजस्व अमला निष्क्रिय – जनप्रतिनिधियों से कार्रवाई की मांग

शासकीय भूमि कब्जा सिवनी – प्रशासन की निष्क्रियता

Seoni 07 April 2026
सिवनी यशो:- नगर मुख्यालय से मंडला मार्ग पर लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम डुगरिया में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर विषय पर न तो जिला प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है और न ही राजस्व विभाग सक्रिय दिखाई दे रहा है। इससे क्षेत्र में असंतोष और विवाद की स्थिति बन रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आमतौर पर ऐसे मामलों में अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व), तहसीलदार और पटवारी द्वारा मौके का निरीक्षण कर कार्रवाई की जाती है, लेकिन यहां नियमों को नजरअंदाज कर कुछ प्रभावशाली लोग पक्के निर्माण कर रहे हैं। इससे यह संदेह भी जताया जा रहा है कि इन कब्जों को कहीं न कहीं मौन सहमति मिल रही है।

शासकीय भूमि कब्जा सिवनी - प्रशासन की निष्क्रियता
शासकीय भूमि कब्जा सिवनी – शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे

 भूमि का महत्व कई दृष्टियों से अहम

ग्राम डुगरिया आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और यहां की शासकीय भूमि कई दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस भूमि के पास अनाज गोदाम स्थित हैं, जहां प्रतिदिन ट्रकों का भारी आवागमन होता है। इसी कारण यहां व्यापारिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और कई दुकानें खुल चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है।

लेकिन इसी के साथ यह भी देखा जा रहा है कि कुछ लोग इस शासकीय भूमि पर स्थायी कब्जा जमाने के उद्देश्य से पक्के मकान बना रहे हैं, जो भविष्य में बड़े विवाद और नुकसान का कारण बन सकता है।

औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ाव, बढ़ी जमीन की कीमत

गौरतलब है कि डुगरिया से सटा हुआ ग्राम भूरकलखापा एक विकसित औद्योगिक क्षेत्र है, जहां कई उद्योग संचालित हो रहे हैं। इस कारण आसपास की जमीन का महत्व और अधिक बढ़ गया है। ऐसे में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

 जनप्रतिनिधियों से सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने विधायक, सांसद, जिला कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी से मांग की है कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ तत्काल बेदखली कार्रवाई की जाए और इस भूमि का उपयोग जनहित के कार्यों में किया जाए।

यदि समय रहते इन अवैध कब्जों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यह बेशकीमती शासकीय भूमि पूरी तरह रसूखदारों के कब्जे में जा सकती है।

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