समलैंगिकता विवाह को मान्यता के विरोध में सनातन संस्कृति रक्षा मंच ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
सिवनी 01 मई 2023
सिवनी यशो:- समलैंगिकता विवाह को मान्यता देने का सनातन संस्कृति मंच के द्वारा तीव्र विरोध किया जा रहा है । सनातन संस्कृति के नेतृत्व में समाज के अनेक संगठनों ने सोमवार 01 मई को कलेक्ट्रेड पहुंचकर देश महामहिम राष्ट्रपति जी के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा । इस दौरान जिले के अनेक धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक, महिला संगठन, सास्कृतिक राजनैतिक और भिन्न भिन्न प्रकार के संगठनों का समावेश रहा आठ सूत्रीय ज्ञापन में कहा गया है कि समलैंगिकता विवाह प्राकृत नियमों एवं संपूर्ण मानव सभ्यता के विपरीत है इसे मान्यता देना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है ।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि भारत के माननीय सर्वाेच्च न्यायालय ने, समलैगिंक एवं विपरीत लिंगी आदि व्यक्तियों के विवाह के अधिकार को, विधि मान्यता देने का निर्णय लेने की, तत्परता बताई है जिसका ज्ञापन सौंपकर विरोध किया जा रहा है ।
ज्ञापन में कहा गया है कि . भारत देश, आज, सामाजिक, आर्थिक क्षेत्रों की अनेक चुनौतियों का, सामना कर रहा है, तब विषयांतर्गत विषय को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनने एवं निर्णीत करने की कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है। देश के नागरिकों की बुनियादी समस्याओं जैस े गरीबी उन्मूलन, नि:शुल्क शिक्षा का क्रियान्वयन, प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार, जनसंख्या नियंत्रण की समस्या, देश की पूरी आबादी को प्रभावित कर रही है, उक्त गंभीर समस्याओं के संबंध में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न तो का ेई तत्परता दिखाई गयी है ना ही कोई न्यायिक सक्रियता दिखाई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भारत विभिन्न धर्मो जातियों, उप जातियों का देश है । इसमें शताब्दियों से केवल जैविक पुरूष एवं जैविक महिला के मध्य, विवाह को मान्यता दी है। विवाह की संस्था न केवल दो विषम लैंगिकों का मिलन है, बल्कि मानव जाति की उन्नति भी है। शब्द विवाह को विभिन्न नियमों, अधिनियमों, लेखों एवं लिपियों में परिभाषित किया गया है। सभी धर्मों में, केवल विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के विवाह का उल्लेख है। विवाह को, दो अलग लैंगिकों के पवित्र मिलन के रूप में, मान्यता देते हुये, भारत का समाज, विकसित हुआ है, पाश्चात्य देशों में लोकप्रिय, दो पक्षों के मध्य, अनुबंध या सहमति को मान्यता नहीं दी है।
ज्ञापन में आठ बिंदुओ के माध्यम से अनेक तर्क दिये गये है और कहा गया है कि हम इस महत्वपूर्ण विषय पर, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिखाई जा रही आतुरता पर, अपनी गहन पीड़ा व्यक्त करते हेै । न्याय की स्थापना एवं न्याय तक पहुंचने के मार्ग को सुनिश्चित करने तथा न्याय पालिका की विश्वनीयता का े कायम रखने के लिये, लंबित मामलों को पूरा करन े एवं महत्वपूर्ण सुधार करने के स्थान पर, एक काल्पनिक मुद्दे पर, न्यायालयीन समय एवं बुनियादी ढांचे को नष्ट/उपयोग किया जा रहा है, जा े सर्वथा अनुचित है।
अतएव हम, आपसे सविनय निवेदन करते है कि आप उक्त विषय पर, सभी हितबद्ध व्यक्तियों/संस्थाओं से, परामर्श करने के लिये, आवश्यक कदम उठाये और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें कि समलैंगिक विवाह, न्याय पालिका द्वारा वैद्य घोषित नही ं किया जाये, क्योंकि उक्त विषय, पूर्ण रूप से, विधायिका के क्षेत्राधिकार में आता है।
यहाँ यह बता दें कि देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के माननीय न्यायधीशों के द्वारा “समलैंगिकता विवाह” को मान्यता देने वाली याचिका की 18 अप्रैल 2023 से नियमित सुनवाई की जा रही है। इस बात से संपूर्ण सनातन समाज आहत है,क्योंकि हिंदू समाज के16 संस्कारों में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है।
नियमित की जा रही सुनवाई के विरोध में देश भर का सनातन समाज उद्वेलित है और सनातन समाज के अनेक क्षेत्रों में कार्य करने वाले संगठन सनातन संस्कृति रक्षा मंच के तत्वाधान में सामूहिक रूप से महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल जी से निवेदन करते है कि इस समलैंगिक विवाह को मान्यता नहीं दी जानी चाहिये । इस पर हो रही सुनवाई भी रोकने की मांग की गयी है ।
सनातन संस्कृति रक्षा मंच ने सर्व समाज से आग्रह किया है कि निर्धारित समय पर कलेक्ट्रेड पहुँचकर समलैंगिकता विवाह को मान्यता संबंधी याचिका पर अपना विरोध दर्ज करायें।





