नेता खुलेआम खिला रहा था सट्टा, कार्यवाही में असफल टी आई हुये निलंबित
इंदौर- उच्चाधिकारियों के बार बार निर्देशों के बाद भी थाना प्रभारी अपने थाना क्षेत्र में सट्टा रोकने में सफल नहीं हुए तो उच्चाधिकारी ने जनता से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर टीम बनाकर छपामारी की जिसमें सट्टे के बड़े कारोबारी को पुलिस ने दबोच लिया और सट्टा कारोबारी से 11 लाख 77 हजार पाँच रूपये नगद एवं अन्य कीमती सामग्री जप्त की गयी । दरअसल यह सट्टे का कारोबारी एक राजनैतिक दल बड़ा नेता था जो थाना प्रभारी से मिला हुआ था और इंदौर के खजराना क्षेत्र में खुलेआम सट्टा खिलाता था । इसकी सूचना आमजनता द्वारा पुलिस के उच्चाधिकारियों को दी जा रही थी पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों ने पुलिस थाना खजराना के थाना प्रभारी को कार्यवाही के लिये निर्देश भी दिये परंतु उनके द्वारा कार्यवाही नहीं की गई।
तब दिनांक 22 मई 2024 को सहायक पुलिस आयुक्त, परदेशीपुरा इन्दौर महानगर जोन-2 के मार्गदर्शन में एक टीम का गठन कर थाना खजराना क्षेत्र के अशरफी कॉलोनी में बड़े सट्टे के अड्डे पर छापामार कार्यवाही की गयी और पुलिस टीम द्वारा 06 आरोपियों को गिरफ्तार कर सट्टे की भारी रकम रूपये 11.77,500 जप्त कर 08 मोबाईल व सट्टा पर्ची के 09 बण्डल रोल भी जप्त किये गये हैं। जिस पर से थाना खजराना में अपराध क्रमांक 450 2024 धारा 419 भादवि, द पब्लिक गैंबलिंग एक्ट का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। इंदौर के खजराना क्षेत्र के नेता के घर चल रहे सट्टे पर कार्रवाई के मामले में टीआई सुजीत श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि बडे पैमाने का सट्टा थाना खजराना क्षेत्र में संचालित हो रहा था, जिसको रोकने में थाना प्रभारी खजराना असफल रहे हैं, जो उनकी कार्य के प्रति लापरवाही व थाना क्षेत्र में नियंत्रण के अभाव व संदिग्ध कार्यवाही को प्रथम दृष्टया स्पष्ट पाया जाकर उनकी कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह को इंगित करता है।
अत: थाना खजराना क्षेत्र में व्यापक व खुलेआम चल रहे सट्टे को रोकने में थाना प्रभारी के असफल होने व थाना क्षेत्र में नियंत्रण का अभाव स्पष्ट होकर संदिग्ध कदाचरण प्रथम दृष्टया स्पष्ट पाया जाने से पुलिस अधिनियम 1861 की धारा 7 व पुलिस रेगुलेशन के पैरा क्रमांक 221 में प्रदत्त शक्तियों के अनुसार निरीक्षक सुजीत श्रीवास्तव, थाना प्रभारी खजराना इन्दौर महानगर जोन-2 को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाकर रक्षित केन्द्र इन्दौर संबंद्ध किया जाता है। निलंबन अवधि में शासकीय सेवक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा एवं बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोडेंगे।





