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धर्मविचारसिवनी

good morning thoughts : हमारी दृष्टि

   हमारी सबसे बड़ी विडम्बना ही यही है कि हमे अपना ग़लत होना दिखाई नही देता परन्तु दूसरे ग़लत दिखाई पड़ते है।यदि इसके मूल मे जायेंगे तो पता चलेगा कि हमारे अंहकार के कारण ही ऐसा दिखाई पड़ता है, अंहकार कभी भी यह स्वीकार नही करता कि मैं गलत हूँ , बस दूसरा ग़लत है, मैं नही। और जब तक अंहकार है, तब तक हमारी दृष्टि कभी साफ़ नही हो सकती ।
   हम भी वही कर रहे होते है ,जो अन्य कर रहे है, पर अन्य ग़लत है, और मैं सही, यही अंहकार है। हमारी दृष्टि बाहर को ही देख पाती है, अन्दर नही , और स्वयं को देखने के लिए दृष्टि बाह्य नही ,अपितु आन्तरिक होनी चाहिए ।
good morning thoughts : हमारी दृष्टि - Seoni News
  जब तक हम अपने आप को स्वीकार नही करेंगे , तब तक दृष्टि आन्तरिक हो ही नही सकती , क्योंकि हम अपने आप का ही सामना नही करना चाहते। स्वयं का सामना होते ही उसका पता चल जायेगा जो हम है, इसलिए अंहकार सदैव यह चेष्टा करता है, कि हम अपना सामना न करे।
ध्यान मार्ग से ही कोई अपने अंदर झाँक सकता है।और स्वयं को देखना ही सही अर्थो मे धर्म है, अन्यथा सब पाखण्ड है, धोखा है।

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