हाड़ गलाने वाली ठंड की हुई शुरूवात
मौसम साफ होने के बाद चली शीत लहर
Seoni 02 January 2025
सिवनी यशो:- दिसंबर माह की समाप्ति के पूर्व दो दिन जिले में हुई बारिश और आसमान से बादलों का डेरा विदा होने के साथ ही तापमान में अचानक से गिरावट के साथ नये साल की शुरूवात हुई । इसके पूर्व ठंड का अहसास कम हो रहा था,दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह के अंतिम दिनों में जिले सहित प्रदेश के अनेक हिस्सों में बारिश होने के बाद मौसम साफ होते ही ठंडी हवाओं ने हाड़ गलाने वाली ठंड का अहसास करा दिया । न्यूनतम तापमान भी 19 डिग्री के ऊपर पहुंच गया था। तीन दिन पूर्व मौसम में अचानक बदलाव और हुई वर्षा ने वातावरण में ठंडक घोल दी है । मौसम साफ होने के बाद शीत लहर चलने से एक बार फिर ठंड बढ़ गई है। शाम होने के बाद लोग ठंड से बचने के लिए आग का सहारा ले रहे हैं। एक दिन पहले सोमवार को जहां न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री दर्ज किया गया था, वहीं मंगलवार को न्यूनतम पारा तीन डिग्री गिरकर 13.4 डिग्री दर्ज किया गया।
दिन में धूप का मजा ले रहे लोग, शाम को गरम कपड़ो में लपट जाते है
दिन में धूप सेकते हुये महिलाएँ और बच्चे देर तक धूप में बैठे रहते है कामकाजी लोग गरम कपड़ो का सहारा लेकर आफिसों में काम करते हुये दिख रहे है । सुबह आठ बजे तक और शाम छह बजे से सिहरन भरी ठंड बढऩे से लोग कांप रहे हैं। वहीं, कई लोग शाम होने के बाद ठंड से राहत पाने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में ठंड औरअधिक बढ़ेगी। आने वाले दिनों में फिर वर्षा होने की संभावना भी मौसम विभाग ने जताई है। ऐसे में यदि वर्षा होती है तो हाड़ गलाने वाली वाली ठंड बढ़ सकती है।
छा रहा घना कोहरा
मौसम में बदलाव के कारण जहां ठंड बढ़ रही है, वहीं सुबह के समय कोहरा छा रहा है। हर दिन सुबह के समय कोहरा छाए रहने से फसलों पर विभिन्न रोगों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों के अनुसार, कोहरे के कारण चने की फसल में इल्लियों का प्रकोप बढ़ सकता है। वहीं, गेहूं की फसल पीली पड़ सकती है। इसे लेकर कृषि विज्ञानी किसानों को फसलों में सिंचाई करने के साथ-साथ उपचार के उपाय भी बता रहे हैं। अधिक कोहरा रहने की स्थिति में किसानों को खेतों के आसपास धुआं करने की सलाह भी दी जा रही है।
ठंड से रहे सावधान, सुरक्षा उपायों का करें उपयोग
चिकित्सको का कहना है कि प्रत्येक वर्ष दिसंबर से फरवरी के महीने में शीत लहर का अधिक प्रभाव रहता है। शीत लहर, बारिश, कोहरा आदि द्वारा प्रभावित करने वाले मौसम संबंधी खतरों के रूप में उभर रहे हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार वैश्विक तापमान में विभिन्न मौसमों के दौरान काफी भिन्नताएं सामने आ रही हैं और उसका प्रभाव पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, पशुधन, आजीविका, सामाजिक अर्थव्यवस्था और अन्य संबध्द क्षेत्रों पर विपरीत पड़ता है। शीत ऋतु में वातावरण का तापमान कम होने (शीत लहर) के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव जैसे सर्दी जुखाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाइपोथर्मिया अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बन जाती है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो, उस स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है।
इन प्रभावों से बचाव हेतु शरीर को सूखा रखें। शरीर की गर्माहट बनाए रखने के लिए अपने सिर, गर्दन, नाक, कान, हाथ और पैर की उंगलियों को पर्याप्त रूप से ढकें। टोपी, मफलर तथा आवरण युक्त एवं जल रोधी जूतों का प्रयोग करें। सिर को ढकें क्योंकि सिर के ऊपरी सतह से शरीर की गर्मी की हानि होती है।
यथासंभव घर के अंदर रहें और ठंडी हवा बारिश से संपर्क को रोकने के लिए अनिवार्य होने पर ही यात्रा करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए विटामिन सी से भरपूर ताजे फल और सब्जियाँ खाएं। गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पिएं, जिसमें शरीर में गर्मी बनी रहेगी। बुजुर्ग नवजात शिशु गर्भवती माताऐं बीमार व्यक्ति तथा बच्चों का अधिक ध्यान रखें क्योंकि उन्हें शीत ऋतु के प्रभाव होने की आशंका अधिक रहती है।




