Seoni 16 March 2025
सिवनी यशो:- मूलत: राजनैतिक पृष्टभूमि वाले वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा जिन्हें प्रेम से आशु भैया कहा जाता था । एक वर्ष पूर्व 16 मार्च 2024 को इस दुनिया से अलविदा हो गये थे । कांग्रेस की सक्रिय राजनीति करते हुये भी आशु भैया अन्य क्षेत्रों में प्रमुखता से अपने विचारों को रखते थे। वे राजनैतिक होने के साथ वकील और पत्रकार भी रहे है ।
वे इस बात के लिये भी जाने जाते थे कि वे व्यापक हित के कायो या भ्रष्टाचार के विरूद्ध पूरी मुखरता से तथ्यात्मक तरीके अपनी बात रखते थे । गोटेगांव से रामटेक रेल लाईन के लिये उन्होंने पोस्ट कार्ड अभियान के रूप में बड़ा अभियान चलाया था जिसका अंत सर्वे की स्वीकृति से हुआ । नगझर से खैरीटेक बायपास के लिये कांग्रेस पार्टी की सरकार से भी लडऩे मे नहीं चूके और तत्कालीन कांग्रेस सरकार से बायपास स्वीकृत कराकर दम लिया । सिवनी विधानसभा से चुनाव हारने के बावजूद कुरई को तहसील बनाने के लिये उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार से लंबा संघर्ष किया । चाहे पेंच परियोजना अंतर्गत सिवनी तक नहर लाने की बात हो या सिवनी को संभाग बनाने की बात हो या मेडीकल कालेज, कृषि महाविद्यालय ऐसी कई जिले की अधोसंरचना विकास के लिये महत्वपूर्ण योजनाओं के लिये वे अपने अंतिम समय तक न केवल मुखर रहे बल्कि पत्राचार भी जारी रखा ।
परिसीमन के दौरान सिवनी संसदीय क्षेत्र एवं घंसौर विधानसभा विलोपित होने को लेकर उन्होंने परिसीमन आयोग के समक्ष जिले की भौगोलिक परिस्थिती एवं अन्य तथ्यपरख तर्क रखकर परिसीमन का विरोध भी किया था । इसके पूर्व परिसीमन को लेकर जनमंच के बैनर तले हुये आंदोलन में उनकी भूमिका अग्रणीय रही । साम्प्रदायिक सौहार्द के आशु भैया सदा पक्षधर रहे जरा सा तनाव व्याप्त होने पर वे सक्रिय हो जाते थे और तत्कालिक परिस्थिती पर दोनो ही पक्षों को समझाने का प्रयत्न करते थे । जब भी ऐसी परिस्थिती उत्पन्न हुई दोनों ही पक्षों ने आशु भैया की बात भले न मानी हो पर सुनी जरूर । इसी विशेषता के चलते जब जब इस जिले में तनाव की स्थिती उत्पन्न हुई तो प्रशासन ने अन्य ऐसी विभूतियों के साथ आशु भैया को न केवल याद किया बल्कि उनका साथ भी लिया । जिले में भाई चारा की भावना बनी रहे और हमारी गंगा जमुनी तहजीब कायम रहे इस उद्देश्य को लेकर ही उन्होंने अपने मित्रवत साथियों के साथ सामाजिक साहित्यिक संस्था सदभाव की नींव डाली और अन्य सामाजिक सारोकार के अलावा संस्था के तत्वाधान में करीब 20 वर्ष तक लगातार अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरा का एक साथ आयोजन किया ।
आशु भैया विचारों से तो पक्के कांग्रेसी थे किंतु उनके संबंध सभी राजनैतिक दलों के लोगो से काफी करीबी थे । एक अच्छा सलाहकार होने के नाते संबंधो की यही निकटता अन्य राजनैतिक दलों के लोगों को बेझिझक उनके पास खींच लाती थी यहाँ पर दलगत राजनीति को परे रखकर अपने अनुभव के आधार पर सलाह देते थे । राजनैतिक क्षेत्र में उनका अनुभव और राजनैतिक ज्ञान काफी समृद्ध था, उनकी इसी खासियत का लाभ न केवल कांग्रेसी बल्कि अन्य राजनैतिक दल के लोग भी लेते थे ।
आज आशु भैया हमारे बीच नहीं तो उनकी कमी महसूस होती है । उनके परिवार, मित्र, शुभचिंतको के साथ उनकी नियमित हर मंगलवार की राजनैतिक डायरी के पाठक जो हर मंगलवार को जिले की डायरी पढऩे के आदी हो गये थे आशु भैया की कमी को महसूस करते है । यहाँ बता दें अपने स्वयं के अखबर दर्पण झूठ न बोले के लिये जिले जो राजनैतिक डायरी लिखते थे वे स्वयं उसे टाईप करते थे जबकि उन्हें बहुत अच्छी तरह से टाईपिंग आती नहीं थी परंतु इसकी गोपनियता बनाये रखने के लिये वे घंटों कम्प्युटर पर बैठकर डायरी टाईप करते थे और इसी प्रकार प्रशासन या राजनैतिक व्यक्तियों को लिखे जाने वाले पत्र भी स्वयं टाईप करते थे । आज उनकी स्मृतियाँ शेष है ।



