सदन में उत्तर से पहले सार्वजनिक हुआ विधानसभा प्रश्न, संसदीय गोपनीयता पर उठे सवाल
20 जुलाई को विधानसभा में होना है प्रश्न का उत्तर, उससे पहले दस्तावेज पहुंचे सार्वजनिक मंच तक; पंचायत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा
विधानसभा प्रश्न सार्वजनिक – सदन से पहले सार्वजनिक हुआ, गोपनीयता पर उठे सवाल
Seoni 28 June 2026
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से जुड़े एक प्रश्न के सार्वजनिक होने के बाद संसदीय गोपनीयता और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
लखनादौन विधायक योगेन्द्र सिंह (बाबा) द्वारा जनपद पंचायत घंसौर की ग्राम पंचायतों से संबंधित पूछा गया अतारांकित प्रश्न क्रमांक-214 अभी विधानसभा में प्रस्तुत भी नहीं हुआ है,
लेकिन उससे संबंधित दस्तावेज और विभागीय पत्राचार सार्वजनिक रूप से प्रसारित हो रहे हैं।
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उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार प्रश्न का विधानसभा में उत्तर 20 जुलाई 2026 को दिया जाना प्रस्तावित है, जबकि संबंधित विभाग को 09 जुलाई 2026 तक उत्तर विधानसभा सचिवालय को भेजना है।

इसके लिए पंचायत राज संचालनालय ने 26 जून 2026 को कलेक्टर सिवनी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सिवनी सहित संबंधित अधिकारियों से 01 जुलाई 2026 तक तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
विधानसभा में आने से पहले सार्वजनिक कैसे हुआ प्रश्न?
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब संबंधित प्रश्न पर विभागीय स्तर पर जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया अभी जारी है, तब उसकी प्रति और उससे जुड़ा पत्राचार सार्वजनिक मंच तक कैसे पहुंचा?
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यह स्पष्ट नहीं है कि दस्तावेज किस स्तर से सार्वजनिक हुए और किसके माध्यम से मीडिया अथवा अन्य लोगों तक पहुंचे।
संसदीय गोपनीयता पर उठे सवाल
संसदीय प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले जानकारों के अनुसार सामान्यतः विधानसभा प्रश्नों की प्रक्रिया गोपनीय मानी जाती है।
प्रश्न विधानसभा सचिवालय में प्रस्तुत होने, परीक्षण और सूचीबद्ध होने के बाद संबंधित विभागों से उत्तर मांगे जाते हैं। प्रश्न और उत्तर सदन की प्रक्रिया के अनुसार सार्वजनिक होते हैं।
ऐसी स्थिति में सदन में उत्तर प्रस्तुत होने से पहले प्रश्न और विभागीय पत्राचार का सार्वजनिक होना संसदीय गोपनीयता को लेकर सवाल खड़े करता है।
हालांकि, इस विशेष मामले में गोपनीयता के किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी या विधानसभा ही कर सकती है।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
जानकारी के अनुसार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित एक अन्य विधायक का विधानसभा प्रश्न भी पूर्व में सार्वजनिक हो चुका था, लेकिन उस मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई सामने नहीं आई।
इससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि संभव है विभागीय स्तर पर ऐसे प्रश्न संबंधित अधिकारियों को व्यापक रूप से भेजे जाते हों अथवा विभाग ने ऐसी कार्यप्रणाली या परंपरा विकसित कर ली हो, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश या स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।
आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी
फिलहाल विधानसभा सचिवालय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
ऐसे में यह प्रश्न बना हुआ है कि विधानसभा प्रश्न की प्रति सार्वजनिक होने की प्रक्रिया क्या थी और क्या यह संसदीय नियमों के अनुरूप थी या नहीं।
यदि संबंधित विभाग या विधानसभा सचिवालय इस विषय में कोई स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उससे स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
https://assembly.cornell.edu/resources/legislative-process-and-parliamentary-procedure



