पेड़ों की हत्या में अफसर बने कसाई: धूमामाल से केवलारी तक हरे कत्ल की साजिश
एक पेड़ की हत्या, इंसान की हत्या से कम नहीं – फिर क्यों मौन है सिवनी का प्रशासन?
धूमामाल, केवलारी में अवैध कटाई के तीन मामले उजागर; सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी के बावजूद प्रशासन मौन
Seoni 20 June 2025
सिवनी यशो:- राज्य सरकार जहां पर्यावरण संतुलन के लिए करोड़ों खर्च कर “हरियाली महाअभियान” चला रही है, वहीं सिवनी जिले में वन और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खुद हरियाली के सबसे बड़े दुश्मन बन बैठे हैं। धूमामाल, केवलारी वन क्षेत्र और केवलारी राजस्व क्षेत्र—तीनों स्थानों से पेड़ों की अवैध कटाई के गंभीर और स्पष्ट प्रमाण सामने आए हैं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई या तो नाममात्र है या पूरी तरह अनुपस्थित।
धूमामाल में पंचायत की ‘फर्जी अनुमति’ से कटे 165 पेड़
घंसौर विकासखंड की ग्राम पंचायत धूमामाल अंतर्गत पीपरटोला में 165 सागौन के वृक्षों की कटाई कर दी गई। यह कटाई महेंद्र सरिता अदिशेष के खसरा क्रमांक 5-27-87-21-18 में हुई है। पंचायत ने कथित रूप से अनुमति दी, लेकिन पंचायत को इस प्रकार की अनुमति देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
ना कोई गणना, ना पंचनामा, और ना वन विभाग की सहमति, इसके बावजूद कटाई को वैध ठहराया जा रहा है।
जब तहसीलदार प्रशांत उईके से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा— “ग्राम पंचायत ने अनुमति दी है, मैं फाइल देखकर बताऊंगा।”
एसडीएम बिसन सिंह गौंड बोले—“मेरे पास कोई जानकारी नहीं है, आपसे ही मिल रही है। जो भी जिम्मेदार होगा, कार्रवाई होगी।”
केवलारी वन विभाग में 5 कर्मचारी निलंबित, मुख्य साजिशकर्ता अब भी आज़ाद
कुछ सप्ताह पहले केवलारी वन परिक्षेत्र में सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई की पुष्टि हुई थी। जांच के बाद वन विभाग ने पांच कर्मचारियों को निलंबित किया, लेकिन मुख्य सूत्रधार कौन हैं? किसने उन्हें संरक्षण दिया? — यह सवाल अनुत्तरित हैं।
वन विभाग की इस कार्रवाई को “बलि का बकरा बनाना” कहा जा रहा है।
केवलारी राजस्व क्षेत्र में 500 पेड़ कटे, कार्यवाही शून्य
केवलारी क्षेत्र के ही एक अन्य मामले में राजस्व विभाग की भूमि पर 500 से अधिक वृक्षों की अवैध कटाई हुई।
एसडीएम द्वारा जांच तो की गई, लेकिन न कोई FIR, न कोई निलंबन — यह दिखाता है कि राजस्व विभाग पेड़ों के माफिया से मिला हुआ है या पूरी तरह निष्क्रिय।
जनता की मांग: FIR दर्ज हो, पौधारोपण कराया जाए
स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की स्पष्ट मांग है—
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तीनों मामलों की स्वतंत्र न्यायिक जांच हो।
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ग्राम पंचायत, तहसील, वन विभाग व राजस्व कर्मियों पर FIR दर्ज की जाए।
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कटे हुए वृक्षों के स्थान पर सघन पौधारोपण अनिवार्य किया जाए।



