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सर्वधर्म सदभाव वाले हिंदुत्व की पहचान है डॉ नरोत्तम मिश्रा
भाजपा संगठन, सरकार व जनता का संकट मोचन चेहरा
-डॉ. दुर्गेश केसवानी
परिचित हो या अपरिचित… मित्र हो या राजनीतिक विरोधी…. मिलते ही सुदर्शन मुस्कुराहट के साथ उसकी समस्या को पल भर में छूमंतर करने का जादू अगर देखना है तो सुबह या शाम भोपाल के चार इमली इलाके का बी -6 बंगला एक राजनीतिक ठिकाना है। इस बंगले में मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का निवास है। यही जादू डॉ नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक दौरों के दौरान भी मध्यप्रदेश के कोने कोने में देखा जा सकता है।
माथे पर लंबा टीका हिंदुत्व की पहचान है लेकिन सभी धर्म के लोगों को एक जैसे सम्मान भरे भाव के साथ मिलना बहुत कम राजनेता कर पाते हैं। जिनमें से एक का नाम डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा है।सर्वधर्म सदभाव वाला हिंदुत्व का चेहरा, माई का लाल है प्रदेश का दुलारा । संभवतः इसीलिए लोग इन्हें नर यानि कि मनुष्यों में उत्तम बताते है, जो हमेशा ही लोगों के दुःख दर्द में उनका संबंल बनता है।
सड़क से लेकर विधानसभा , क्षेत्र से लेकर भोपाल और परिवार से लेकर सार्वजनिक जीवन तक चाहे परिवार- संगठन-जनता ने जब जो जबाबदारी सौंपी उस पर हमेशा खरा उतरते रहे हैं डॉ नरोत्तम मिश्रा। संभवतः इसीलिए वे संकट मोचक के तौर पर भी पहचाने जाते हैं।
संसदीय मूल्यों और परंपराओं की बात की जाए तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे विरले ही राजनेता होगें जिन्हें संसदीय ज्ञान पर पकड़ है। यही कारण है कि भाजपा की सरकार में हमेशा उन्हें संसदीय कार्यमंत्री के रूप में दायित्व दिया जाता रहा है। इसी वजह से पिछले 16 वर्षों के दौरान जब-जब भाजपा की प्रदेश सरकार पर संकट आया तब एक संकट मोचन की तरह डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने अपनी सूझबूझ और संसदीय ज्ञान से उसे संकट से पार दिलाया।
परिचित हो या अपरिचित… मित्र हो या राजनीतिक विरोधी…. मिलते ही सुदर्शन मुस्कुराहट के साथ उसकी समस्या को पल भर में छूमंतर करने का जादू अगर देखना है तो सुबह या शाम भोपाल के चार इमली इलाके का बी -6 बंगला एक राजनीतिक ठिकाना है। इस बंगले में मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का निवास है। यही जादू डॉ नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक दौरों के दौरान भी मध्यप्रदेश के कोने कोने में देखा जा सकता है।
माथे पर लंबा टीका हिंदुत्व की पहचान है लेकिन सभी धर्म के लोगों को एक जैसे सम्मान भरे भाव के साथ मिलना बहुत कम राजनेता कर पाते हैं। जिनमें से एक का नाम डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा है।सर्वधर्म सदभाव वाला हिंदुत्व का चेहरा, माई का लाल है प्रदेश का दुलारा । संभवतः इसीलिए लोग इन्हें नर यानि कि मनुष्यों में उत्तम बताते है, जो हमेशा ही लोगों के दुःख दर्द में उनका संबंल बनता है।
सड़क से लेकर विधानसभा , क्षेत्र से लेकर भोपाल और परिवार से लेकर सार्वजनिक जीवन तक चाहे परिवार- संगठन-जनता ने जब जो जबाबदारी सौंपी उस पर हमेशा खरा उतरते रहे हैं डॉ नरोत्तम मिश्रा। संभवतः इसीलिए वे संकट मोचक के तौर पर भी पहचाने जाते हैं।
संसदीय मूल्यों और परंपराओं की बात की जाए तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे विरले ही राजनेता होगें जिन्हें संसदीय ज्ञान पर पकड़ है। यही कारण है कि भाजपा की सरकार में हमेशा उन्हें संसदीय कार्यमंत्री के रूप में दायित्व दिया जाता रहा है। इसी वजह से पिछले 16 वर्षों के दौरान जब-जब भाजपा की प्रदेश सरकार पर संकट आया तब एक संकट मोचन की तरह डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने अपनी सूझबूझ और संसदीय ज्ञान से उसे संकट से पार दिलाया।
मध्य प्रदेश की पावन धरती पर 15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में जन्में डॉ. नरोत्तम मिश्रा वर्तमान समय में मध्य प्रदेश की राजनीति का ध्रुव बने हुए है। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे नरोत्तम मिश्रा साल 1977-78 में जीवाजी विश्वविद्यालय छात्रसंघ में सचिव चुने गए जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मिलनसार स्वभाव और लोगों के बीच आसानी से घुलमिल जाने वाले नरोत्तम मिश्रा की अपनी ही एक राजनीतिक विरासत है, उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की है। वर्ष 1978-80 में वह मध्य प्रदेश भारतीय जनता युवा मोर्चा कार्यकारणी के सदस्य के रूप में सकिय राजनीति में आए और 1985-87 तक उन्होंने मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी प्रांतीय कार्यकारणी में एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अजीवन स्वयंसेवक और भारतीय जनता पार्टी के एक समर्पित कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता के रूप में डॉ.मिश्रा लगातार कर्मयोगी की तरह जीवन के पथ पर अग्रसर है। यही बात है कि हिंदुत्व का यह चेहरा सर्वधर्म सदभाव के लिए अपनी एक अलग पहचान रखते है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा की चुनावी राजनीतिक की शुरूआत 1990 में हुई जब वह नवम विधानसभा के सदस्य के रूप में मध्य प्रदेश विधानसभा पहुँचे और लोकलेखा समिति के सदस्य बने। यही से उनके संसदीय ज्ञान की शुरूआत हुई । जिसने उन्हें संसदीय ज्ञान का ज्ञाता बना दिया। संसदीय मूल्यों और परंपराओं की बात की जाए तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे विरले ही राजनेता होगें जिन्हें संसदीय ज्ञान पर पकड़ है। यही कारण है कि भाजपा की सरकार में हमेशा उन्हें संसदीय कार्यमंत्री के रूप में दायित्व दिया जाता रहा है। 1990 में ही डॉ.मिश्रा विधानसभा में सचेतक भी रहे। साल 1998 में दूसरी बार, 2003 में तीसरी बार, 2008 में चौथी बार, 2013 में पाँचवी बार और 2018 में लगातार छठवीं बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 01 जून 2005 को पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने अपने मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के रूप में शामिल किया। जिसके बाद उन्होंने अपनी एक अलग ही लकीर खींची जो कैबिनेट मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ जल संसाधन, जनसंपर्क, संसदीय कार्य, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी निभाते हुए वर्ष 2018 में कांग्रेस की जनविरोधी सरकार को सत्ता से बेदखल कर पुनः सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर प्रदेश के गृहमंत्री का पद सम्हाल रहे है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा जितने अपनी पार्टी में लोकप्रिय है उतने ही विपक्षी पार्टीयों में भी उनकी लोकप्रियता है। यही वजह है कि कांग्रेस ही नहीं जितने भी विपक्षी दल के नेता है उनके व्यावहार और राजनीतिक कार्यकुशलता का लोहा मानते है।
पिछले 16 वर्षों के दौरान जब-जब भाजपा की प्रदेश सरकार पर संकट आया तब एक संकट मोचन की तरह डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने अपनी सूझबूझ और संसदीय ज्ञान से उसे संकट से पार दिलाया। पार्टी को अपनी माँ मानने वाले माँ पीतांबरा के परम भक्त डॉ. नरोत्तम मिश्रा माई के दरबार में हमेशा ही नतमस्तक रहे है। उनके दिन की शुरूआत माँ पीतांबरा की भक्ति से शुरू होती है। एक कर्मयोगी की तरह सतत् जनसेवा में लगे रहने वाले डॉ.मिश्रा की ही परिकल्पना है जो उनके गृह नगर डबरा में भव्य नौ ग्रह मंदिर का निर्माण हो रहा है। जहाँ श्रद्धालु सभी देवी देवताओं और ग्रहों के दर्शन लाभ ले सकेंगे। डबरा में निर्माणाधीन यह नौ ग्रह मंदिर ऐसी परिकल्पना है जो हिन्दू समाज के लिए एक तीर्थ क्षेत्र बनेगा।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा जहाँ अपने विधानसभा क्षेत्र दतिया में लोकप्रिय राजनेता की छवि रखते है तो वही वह अपनी पार्टी सदस्यों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की बिरादरी में एक सहज और सरल व्यक्तित्व के रूप में उनके हर सुख दुःख में उनके साथ खड़े मिलते है। अपनी मोहक मुस्कान से सबको मोह लेने वाले ऐसे विरले ही राजनेता होते है जो हर एक व्यक्ति का परिवार का सदस्य होता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए पौरुषुत्व को कवि दुष्यंत कुमार की कविता के इन दो लाइनों से समझा जा सकता है- इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी जीत दिलाने का जिम्मा हो या फिर पश्चिम बंगाल चुनाव में दहाड़ मारती उनकी आवाज जीत की तरफ इशारा करती है। अपनी वाकपटुता और चातुर्य से दुश्मन को चारोंखाने कैसे चित करना है अगर किसी से सीखना है तो वह डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही हो सकते है।
माँ कमला देवी और पिता डॉ. शिवदत्त मिश्रा के यहां जन्म लेने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा अपने तीन भाईयों और तीन बहिनों के साथ जहाँ अपने कुल का नाम रोशन कर रहे है तो वही उनके पुत्र अशुंमान, सुकर्ण और बेटी मृगनयनी और दामाद सहित नाती पोतों के साथ जीवन के 61 वें वसंत का आनंद ले रहे है। उनकी सामाजिक और राजनैतिक यात्रा हमेशा यूं ही अविरल चलती रहे। भारतीय जनता पार्टी के ध्येय पर चलने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा के जीवन का एक ही मूल मंत्र है जिसे वह कहते है-चरैवेति-चरैवेति यही तो मंत्र है अपना। नहीं रूकना, नहीं थकना सतत चलना सतत चलना ।
-लेखक भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा की चुनावी राजनीतिक की शुरूआत 1990 में हुई जब वह नवम विधानसभा के सदस्य के रूप में मध्य प्रदेश विधानसभा पहुँचे और लोकलेखा समिति के सदस्य बने। यही से उनके संसदीय ज्ञान की शुरूआत हुई । जिसने उन्हें संसदीय ज्ञान का ज्ञाता बना दिया। संसदीय मूल्यों और परंपराओं की बात की जाए तो डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे विरले ही राजनेता होगें जिन्हें संसदीय ज्ञान पर पकड़ है। यही कारण है कि भाजपा की सरकार में हमेशा उन्हें संसदीय कार्यमंत्री के रूप में दायित्व दिया जाता रहा है। 1990 में ही डॉ.मिश्रा विधानसभा में सचेतक भी रहे। साल 1998 में दूसरी बार, 2003 में तीसरी बार, 2008 में चौथी बार, 2013 में पाँचवी बार और 2018 में लगातार छठवीं बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 01 जून 2005 को पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने अपने मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री के रूप में शामिल किया। जिसके बाद उन्होंने अपनी एक अलग ही लकीर खींची जो कैबिनेट मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ जल संसाधन, जनसंपर्क, संसदीय कार्य, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारी निभाते हुए वर्ष 2018 में कांग्रेस की जनविरोधी सरकार को सत्ता से बेदखल कर पुनः सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर प्रदेश के गृहमंत्री का पद सम्हाल रहे है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा जितने अपनी पार्टी में लोकप्रिय है उतने ही विपक्षी पार्टीयों में भी उनकी लोकप्रियता है। यही वजह है कि कांग्रेस ही नहीं जितने भी विपक्षी दल के नेता है उनके व्यावहार और राजनीतिक कार्यकुशलता का लोहा मानते है।
पिछले 16 वर्षों के दौरान जब-जब भाजपा की प्रदेश सरकार पर संकट आया तब एक संकट मोचन की तरह डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने अपनी सूझबूझ और संसदीय ज्ञान से उसे संकट से पार दिलाया। पार्टी को अपनी माँ मानने वाले माँ पीतांबरा के परम भक्त डॉ. नरोत्तम मिश्रा माई के दरबार में हमेशा ही नतमस्तक रहे है। उनके दिन की शुरूआत माँ पीतांबरा की भक्ति से शुरू होती है। एक कर्मयोगी की तरह सतत् जनसेवा में लगे रहने वाले डॉ.मिश्रा की ही परिकल्पना है जो उनके गृह नगर डबरा में भव्य नौ ग्रह मंदिर का निर्माण हो रहा है। जहाँ श्रद्धालु सभी देवी देवताओं और ग्रहों के दर्शन लाभ ले सकेंगे। डबरा में निर्माणाधीन यह नौ ग्रह मंदिर ऐसी परिकल्पना है जो हिन्दू समाज के लिए एक तीर्थ क्षेत्र बनेगा।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा जहाँ अपने विधानसभा क्षेत्र दतिया में लोकप्रिय राजनेता की छवि रखते है तो वही वह अपनी पार्टी सदस्यों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की बिरादरी में एक सहज और सरल व्यक्तित्व के रूप में उनके हर सुख दुःख में उनके साथ खड़े मिलते है। अपनी मोहक मुस्कान से सबको मोह लेने वाले ऐसे विरले ही राजनेता होते है जो हर एक व्यक्ति का परिवार का सदस्य होता है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा के लिए पौरुषुत्व को कवि दुष्यंत कुमार की कविता के इन दो लाइनों से समझा जा सकता है- इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है, नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी जीत दिलाने का जिम्मा हो या फिर पश्चिम बंगाल चुनाव में दहाड़ मारती उनकी आवाज जीत की तरफ इशारा करती है। अपनी वाकपटुता और चातुर्य से दुश्मन को चारोंखाने कैसे चित करना है अगर किसी से सीखना है तो वह डॉ. नरोत्तम मिश्रा ही हो सकते है।
माँ कमला देवी और पिता डॉ. शिवदत्त मिश्रा के यहां जन्म लेने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा अपने तीन भाईयों और तीन बहिनों के साथ जहाँ अपने कुल का नाम रोशन कर रहे है तो वही उनके पुत्र अशुंमान, सुकर्ण और बेटी मृगनयनी और दामाद सहित नाती पोतों के साथ जीवन के 61 वें वसंत का आनंद ले रहे है। उनकी सामाजिक और राजनैतिक यात्रा हमेशा यूं ही अविरल चलती रहे। भारतीय जनता पार्टी के ध्येय पर चलने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा के जीवन का एक ही मूल मंत्र है जिसे वह कहते है-चरैवेति-चरैवेति यही तो मंत्र है अपना। नहीं रूकना, नहीं थकना सतत चलना सतत चलना ।
-लेखक भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता है।





