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विधानसभा चुनाव महाकौशल क्या करने वाला है ?-2

आदिवासी वोटरों पर सत्ता का दारोमदार, महाकौशल में व्यापक प्रभाव
महाकौशल की 38 सीटों में से 24 कांग्रेस के पास और भाजपा के पास 13 है एक सीट पर निर्दलीय
भाजपा को बूथ सशक्तिकरण पर भरोसा

सिवनी ०4 मई 2023
सिवनी यशो:- राजनीतिक दृष्टि से मध्य प्रदेश देश का बड़ा राज्य हैं, जहां साल के अंत में विधानसभा चुनाव भी होना और अगले वर्ष लोकसभा के चुनाव होना है लोकसभा की 29 सीटों में से 28 पर भाजपा का कब्जा है जबकि 230 विधानसभाओं वाले प्रदेश में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुये ज्योतिरादित्य सिंधिंया और उनके समर्थक विधायकों के स्तीफे के कारण प्रदेश में उपचुनावों के बाद भाजपा की सत्ता है और मुख्य चुनाव में 109 सीटों वाली भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता छीनने के साथ वर्तमान में 127 विधायक कर सत्ता पर काबिज है ।
मध्य प्रदेश भौगोलिक रूप से महाकौशल, ग्वालियर-चंबल, मध्य भारत, निमाड़-मालवा, विंध्य और बुंदेलखंड इलाकों में बांटा गया है. इन इलाकों में जातीय और सामाजिक समीकरण अलग-अलग हैं. दोनों दलों के क्षत्रपों का प्रभाव भी है. नवंबर माह में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हमने गतांक में मालवा निमाड़ क्षेत्र की स्थिती का उल्लेख किया था जहाँ आदिवासी संगठन जयस से समझौता होने बाद पिछले 2018 के चुनाव में कांग्रेस को बढ़त मिली थी और मालवा निमाड़ा में 2013 के मुकाबले कांग्रेस को 2018 में एकतरफा सफलता प्राप्त हुई थी । आज हम महाकौशल इलाके का राजनीतिक विश्लेषण करेंगे ।
महाकौशल में जबलपुर, छिंदवाड़ा, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिले हैं. महाकौशल के चुनावी नतीजे हमेशा चौकाने वाले रहे हैं. 2018 के चुनाव में बीजेपी को महाकौशल इलाके से निराशा हाथ लगी थी. इसकी बड़ी वजह आदिवासियों की नाराजगी मानी गई थी.
मालवा निमाड़ की ही तरह कांग्रेस को महाकौशल अंचल में भी 2018 के चुनाव में भारी सफलता प्राप्त हुई थी और महाकौशल क्षेत्र की 38 विधानसभाओं में से 24 सीटे कांग्रेस के पाले गई थी जबकि 2013 के चुनाव में कांग्रेस के पास महज 13 सीटे थी और बीजेपी के पास 24 सीटे थी दोनों बार महाकौशल से एक सीट निर्दलीय के खाते में गयी थी ।
महाकौशल क्षेत्र में 16 आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है अनुसूचित जाति के लिये 06 और जनजाति वर्ग के 13 आरक्षित सीटे है कांग्रेस को आरक्षित सीटों पर अच्छी सफलता प्राप्त हुई थी । महाकौशल क्षेत्र में जयस का अधिक प्रभाव नहीं है परंतु जयस राजनैतिक संगठन न होकर सामाजिक संगठन है और महाकौशल में जनजाति वर्ग के बीच व्यापक प्रभाव वाली गौंडवाना गणतंत्र पार्टी राजनैतिक दल है जिसके प्रत्याशियों से भाजपा को बड़ा राजनैतिक लाभ होता है परंतु इस बार कांग्रेस जयस और गौंडवाना गणतंत्र पार्टी को साधने के लिये पूरा प्रयास कर रही है ।
वहीँ भाजपा आदिवासी मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिये निरंतर प्रयास कर रही है पेसा एक्ट, जनजाति गौरव दिवस आदि कार्यक्रम भाजपा के उसी क्रम के प्रयास है इसके साथ ही भाजपा पूरे मध्यप्रदेश में बूथ विस्तारक अभियान के माध्यम से एक एक कार्यकत्र्ता के माध्यम से बूथों को मजबूत करने में जुटी हुई है भाजपा के नेताओं का कहना है कि हर बूथ में 51 प्रतिशत वोट शेयर सुनिश्चित कर भाजपा की जीत को सुनिश्चित किया जायेगा । हर दिन भाजपा के चलने वाले कार्यक्रम भाजपा की पुन: सत्ता में काबिज होने की तैयारी है और इसके लिये भाजपा का कठोर परिश्रम भी चल रहा है । वहीं शिवराज सरकार द्वारा लोकलुभावनी घोषणाएँ जिनमें प्रदेश की आधी आबादी को साधने के लिये लाड़ली बहना योजना है ।
लाड़ली बहना योजना की घबराहट कांग्रेस में भी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिलाओ को एक हजार प्रतिमाह के स्थान पंद्रह सौ रूपये महिने देने के साथ पाँच सौ रूपये गैस सिलेंडर और 100 रूपये 100 युनिट बिजली देने की घोषणा कर अपनी घबराहट को जाहिर किया है । कमलनाथ जी की घोषणा की मिश्रित प्रतिक्रिया आमजनता में व्यापक रूप से है और कांग्रेस को इसका लाभ भी मिलने की अच्छी संभावना है । कांग्रेस एवं भाजपा के सीधे मुकबले में कांग्रेस का पलड़ा हमेशा भारी रहा है परंतु गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा की जीत में सहायक रहे है 2023 के चुनाव में आम आदमी पार्टी की भी बड़ी भूमिका होने की संभावना है आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस एवं भाजपा की ही तरह मुफ्म रेवडिय़ाँ बांटने की घोषणा का जादू चलायेगी इससे किससे को अधिक नुकसान होगा कुछ कहा नहीं जा सकता परंतु आम आदमी पार्टी की उपस्थिती बड़ा प्रभाव दिखाने की तैयारी में दिखाई दे रही । वहीं औवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (्रढ्ढरूढ्ढरू ) की उपस्थिती कांग्रेस के लिये घातक हो सकती है ।
कांग्रेस पार्टी आदिवासी मतदाताओ में प्रभाव वाले राजनैतिक दलों से समझौते के बल पर फतह की उम्मीद कर रही है तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ का महाकौशल में व्यापक प्रभाव कांग्रेस की राह आसान कर रहा है वहीं भाजपा में असंतोष और गुटबाजी भाजपा के लिये सिरदर्द बना हुआ है इस के बावजूद भी भाजपा का बूथ सशक्तिकरण अभियान और निरंतर मतदाताओं के बीच चल रहे कार्यक्रम भाजपा के लिये संजीवनी साबित हो सकते है ।
आगामी अंक में ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनैतिक स्थिती

Dainikyashonnati

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