सिवनीमध्यप्रदेश

विधानसभा में गूंजेगा घंसौर पंचायतों का ‘काला चिट्ठा’: बरेला, कटोरी और दिवारी के विकास कार्यों पर सरकार से मांगा जवाब

विधायक योगेन्द्र सिंह (बाबा) के सवालों से पंचायत विभाग में हलचल, उत्तर से पहले प्रश्न सार्वजनिक होने पर भी उठे सवाल

घंसौर पंचायतों का मामला विधानसभा में: विधायक बाबा ने मांगा हिसाब

घंसौर/सिवनी यशो :- सिवनी जिले की जनपद पंचायत घंसौर की ग्राम पंचायतों में कथित वित्तीय अनियमितताओं, अधूरे विकास कार्यों और सरकारी राशि के उपयोग से जुड़े मामले अब मध्यप्रदेश विधानसभा में गूंजने जा रहे हैं। लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के विधायक योगेन्द्र सिंह (बाबा) ने विधानसभा के प्रश्न क्रमांक 214 के माध्यम से पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। इन सवालों ने पंचायतों में हुए विकास कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

विधायक ने ग्राम पंचायत बरेला में वर्ष 2024-25 से 2026-27 के दौरान पंचायत निधि, 14वें, 15वें एवं 5वें वित्त आयोग सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त एवं व्यय की गई राशि का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। साथ ही पूछा है कि यदि प्रतिबंधित मदों में राशि निकाली गई अथवा नियमों के विरुद्ध भुगतान किए गए हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि यदि किसी पंचायत सचिव ने सेवा निवृत्ति से पहले नियमों के विरुद्ध राशि का आहरण किया है, तो उसकी सेवानिवृत्ति अथवा अन्य देय लाभों पर रोक लगाने के लिए शासन ने क्या कदम उठाए हैं।

इसी क्रम में विधायक ने ग्राम पंचायत दिवारी में तालाब जीर्णोद्धार कार्य की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि कार्य के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना व्यय हुआ और यदि कार्य अधूरा है तो उसके पीछे क्या कारण हैं। वहीं शिकारा से सेराठी तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत सड़क निर्माण की मांग भी विधानसभा में उठाई गई है। विधायक ने सरकार से पूछा है कि वर्षों से लंबित इस सड़क का निर्माण कब तक कराया जाएगा।

विधानसभा सचिवालय से प्राप्त प्रश्नों के आधार पर पंचायत राज संचालनालय द्वारा कलेक्टर सिवनी, संभागीय आयुक्त जबलपुर तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा गया है। इससे स्पष्ट है कि विभागीय स्तर पर प्रश्नों के उत्तर तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

इस बीच विधानसभा में उत्तर प्रस्तुत होने से पहले ही प्रश्न की प्रति जिला प्रशासन तक पहुंचने और उसके सार्वजनिक होने की चर्चा भी तेज हो गई है। राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में इसे विधानसभा प्रश्नों की गोपनीयता व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में विधानसभा सचिवालय अथवा राज्य शासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है।

विधानसभा में इन प्रश्नों पर सरकार के उत्तर के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पंचायतों में विकास कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही के संबंध में शासन का क्या पक्ष है। पूरे जिले की निगाहें अब विधानसभा में दिए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

इनका कहना है

“जनता के खून-पसीने की कमाई से चलने वाली योजनाओं में एक पैसे की भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधानसभा में उठाया गया हर सवाल जनता के अधिकार और विकास के लिए है। यदि कहीं भ्रष्टाचार, लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए मैं पूरी ताकत से संघर्ष करूंगा।”

— योगेन्द्र सिंह (बाबा), विधायक, लखनादौन विधानसभा क्षेत्र

(संपादकीय टिप्पणी)
यह समाचार विधानसभा में पूछे गए प्रश्न, उपलब्ध दस्तावेजों एवं संबंधित विभागों से मांगी गई जानकारी पर आधारित है। प्रश्नों में लगाए गए बिंदुओं पर अंतिम स्थिति एवं निष्कर्ष विधानसभा में सरकार द्वारा दिए जाने वाले आधिकारिक उत्तर अथवा सक्षम प्राधिकारी की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

मध्यप्रदेश विधानसभा प्रश्न क्रमांक 214 और पंचायत राज संचालनालय द्वारा सिवनी प्रशासन को भेजा गया पत्र
विधानसभा प्रश्न क्रमांक 214 के संबंध में पंचायत राज संचालनालय द्वारा कलेक्टर सिवनी एवं जिला पंचायत सीईओ से जानकारी मांगे जाने का पत्र। प्रश्न के सदन में प्रस्तुत होने से पहले दस्तावेज सार्वजनिक होने पर चर्चा तेज हुई।

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