छोटा उदेपुर (गुजरात)। गुजरात के आदिवासी बहुल छोटा उदेपुर जिले के ग्राम वासणा (कोषिन्द्रा) में शनिवार को एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन संपन्न हुआ। द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित नवस्थापित श्री आनंद वर्धन आश्रम का उद्घाटन द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज के करकमलों से विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु, ग्रामीण, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न समाचार माध्यमों के पत्रकार उपस्थित रहे। आयोजन का वीडियो भी उपलब्ध है।
उद्घाटन समारोह के दौरान शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के सान्निध्य में 25 आदिवासी एवं वनवासी महिला-पुरुषों ने स्वेच्छा से गंगाजल ग्रहण किया, भगवान श्रीराम का मंत्र ग्रहण किया तथा सनातन हिंदू परंपरा के पालन का संकल्प लिया।
आयोजनकर्ताओं के अनुसार प्रतिभागियों ने अपने धार्मिक जीवन को सनातन परंपरा के अनुरूप आगे बढ़ाने की प्रतिज्ञा व्यक्त की।
अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि वे वर्षों से आदिवासी एवं वनवासी क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वासणा में आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना से स्वधर्मानयन अभियान को नई ऊर्जा और स्थायी आधार मिलेगा।
शंकराचार्य ने कहा कि आश्रम केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक शिक्षा, संस्कार, सेवा और समाज जागरण का केंद्र बनेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में इस आश्रम के माध्यम से आसपास के अनेक गांवों में सांस्कृतिक एवं धार्मिक जागरण का कार्य और अधिक व्यापक रूप से संचालित होगा।
कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन, आशीर्वचन तथा धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आश्रम की स्थापना को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया।
आयोजनकर्ताओं का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार, सेवा और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना की गई है।
उनका विश्वास है कि यह केंद्र आने वाले वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



