मंडलामध्यप्रदेश

जलते अंगारे और बेल्ट से नाबालिग छात्रों को बेरहमी से पीटा! आधी रात हॉस्टल में ‘सजा’ का खौफनाक आरोप

चोरी के शक में तीन जूनियर छात्रों को नींद से जगाने का दावा, हथेलियों पर रखे जलते अंगारे; तीन दिन बाद पिता को भेजी जले हाथों की तस्वीर तो सामने आया पूरा मामला

मंडला हॉस्टल बना ‘सजा का अड्डा’! जूनियर छात्रों के हाथों पर जलते अंगारे

मंडला यशो:- बच्चों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए बनाए गए छात्रावास में अगर आधी रात नाबालिग बच्चों को नींद से उठाकर कथित तौर पर बेल्ट से पीटा जाए और उनकी हथेलियों पर जलते हुए अंगारे रख दिए जाएं, तो इसे महज अनुशासन का मामला नहीं कहा जा सकता। मंडला जिले के नैनपुर क्षेत्र के पाठा सिहोरा स्थित सीनियर एवं जूनियर बालक छात्रावास से सामने आए कथित घटनाक्रम ने छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंडला पाठा सिहोरा छात्रावास में नाबालिग छात्रों से कथित मारपीट का मामला
मंडला के पाठा सिहोरा स्थित बालक छात्रावास की तस्वीर और कथित घटना में घायल छात्रों के हाथ।

आरोप है कि चोरी के शक में तीन जूनियर छात्रों को रात करीब एक बजे नींद से जगाया गया। इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और बेल्ट से पीटा गया। आरोप यह भी है कि छात्रों की हथेलियों पर जलते हुए अंगारे रखे गए। इस कथित ‘तालिबानी सजा’ के बाद छात्रों के हाथ झुलसने की बात सामने आई है।

मामला सामने आने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में आक्रोश है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

आधी रात नींद से जगाया, फिर शुरू हुई कथित ‘तालिबानी सजा’

पीड़ित छात्रों के अनुसार, रात करीब एक बजे उन्हें उनके बिस्तर से उठाया गया। आरोप है कि चोरी के शक में उनसे पूछताछ की गई और इसके बाद कथित तौर पर बेल्ट से बेरहमी से मारपीट की गई।

मंडला पाठा सिहोरा छात्रावास में नाबालिग छात्रों से कथित मारपीट का मामला
मंडला के पाठा सिहोरा स्थित बालक छात्रावास की तस्वीर और कथित घटना में घायल छात्रों के हाथ।

छात्रों का आरोप है कि मारपीट के बाद उनके हाथों पर जलते हुए अंगारे रखे गए। अचानक हुए इस कथित घटनाक्रम से बच्चे बुरी तरह घबरा गए और उन्हें काफी पीड़ा हुई।

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन बच्चों के साथ यह कथित घटना हुई, वे नाबालिग हैं और छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

सवाल—आधी रात छात्रावास के अंदर होता रहा सबकुछ, जिम्मेदारों को भनक तक नहीं लगी?

घटना ने छात्रावास की निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

आधी रात करीब एक बजे नाबालिग छात्रों को उठाया गया। कथित तौर पर उनके साथ बेल्ट से मारपीट हुई। हाथों पर जलते अंगारे रखे जाने का आरोप है। लेकिन सवाल यह है कि उस समय छात्रावास में जिम्मेदार कौन था?

क्या रात में छात्रों की निगरानी के लिए कोई कर्मचारी मौजूद था?

क्या छात्रावास अधीक्षक को इसकी जानकारी थी?

यदि घटना छात्रावास परिसर में हुई तो जिम्मेदार कर्मचारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

और यदि किसी कर्मचारी को जानकारी हुई थी, तो इसकी सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची?

बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था पर उठ रहे ये सवाल अब जांच का हिस्सा बन गए हैं।

तीन दिन बाद जले हाथों की तस्वीर ने खोला पूरा मामला

कथित घटना के तत्काल बाद मामला सामने नहीं आया। बताया जा रहा है कि घटना के करीब तीन दिन बाद एक छात्र ने अपने जले हुए हाथों की तस्वीर अपने पिता राजेश कुलस्ते को भेजी।

तस्वीर देखने के बाद पिता को पूरे मामले की जानकारी हुई। बच्चे के हाथों की हालत देखकर परिजनों ने उपचार की बात कही।

इसके बाद मामला धीरे-धीरे सामने आया और छात्रावास प्रबंधन की ओर से छात्रों का उपचार डिठौरी में करवाए जाने की जानकारी सामने आई।

यही वह तस्वीर थी, जिसने छात्रावास के भीतर हुई कथित घटना को परिजनों के सामने ला दिया।

ग्रामीणों में आक्रोश—नाबालिग बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

मामले की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चे अपने परिवार से दूर रहते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित छात्रावास प्रबंधन एवं विभाग की होती है।

ग्रामीणों का सवाल है कि अगर बच्चों को चोरी के शक में पूछताछ करनी थी तो क्या उन्हें इस तरह कथित रूप से पीटने और जलते अंगारों से प्रताड़ित करने का अधिकार किसी को है?

ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

सिर्फ मारपीट नहीं, पूरी व्यवस्था पर सवाल

यह मामला केवल तीन छात्रों के साथ कथित मारपीट तक सीमित नहीं है। घटना ने छात्रावास की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात में छात्रों की निगरानी कौन करता है?

छात्रावास में अधीक्षक और कर्मचारियों की ड्यूटी किस प्रकार निर्धारित है?

रात के समय छात्रावास में अनुशासन और सुरक्षा की निगरानी कैसे होती है?

किसी अप्रिय घटना की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने की व्यवस्था क्या है?

और सबसे बड़ा सवाल—यदि छात्रावास में नाबालिग बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

इन सभी बिंदुओं की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

पीड़ित छात्र ने बताया घटनाक्रम

पीड़ित छात्र ने अपने बयान में कथित घटना के संबंध में जानकारी दी है। छात्र के बयान को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नाबालिग छात्र की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।

पिता राजेश कुलस्ते ने बताई पूरी कहानी

छात्र के पिता राजेश कुलस्ते के अनुसार, उन्हें घटना की जानकारी तब हुई जब उनके बेटे ने जले हुए हाथों की तस्वीर उन्हें भेजी। तस्वीर देखने के बाद उन्होंने बच्चे की स्थिति के बारे में जानकारी ली और उपचार की बात कही।

परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और वास्तविकता सामने लाई जाए।

छात्रावास इंचार्ज अनिल कुमार उइके ने रखा पक्ष

मामले में छात्रावास इंचार्ज अनिल कुमार उइके का पक्ष भी सामने आया है। छात्रावास प्रबंधन की ओर से छात्रों के उपचार और घटनाक्रम के संबंध में जानकारी दी गई है।

चूंकि मामला जांच के अधीन है, इसलिए आरोपों की वास्तविकता और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

सहायक आयुक्त बोले—जांच समिति गठित, दोषी पर होगी कार्रवाई

मामला सामने आने के बाद जनजातीय कार्य विभाग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। सहायक आयुक्त अरुण शुक्ला के अनुसार मामला उनके संज्ञान में आया है और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है।

अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच बताएगी—उस रात छात्रावास में आखिर हुआ क्या था?

फिलहाल जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि उस रात छात्रावास में वास्तव में क्या हुआ, छात्रों के साथ किस स्तर तक मारपीट हुई और जलते अंगारे रखने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

लेकिन इस कथित घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—

जिस छात्रावास में बच्चों को घर से दूर सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, वहीं अगर आधी रात को उनके साथ कथित मारपीट और ‘तालिबानी सजा’ जैसी घटना के आरोप सामने आएं, तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

दैनिक यशोन्नति पूरे मामले में जांच की रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है।

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