पहले घर उजड़े, अब पानी ने घेरा: बरगी बांध के विस्थापितों के घरों में घुसा जलाशय का पानी
बीजासेन में बच्चों का खेल मैदान डूबा, शौचालय तक जलमग्न; दरवाजों तक पहुंचा पानी, जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
बरगी बांध का पानी विस्थापितों के घरों में घुसा, बीजासेन में मचा हड़कंप
सिवनी यशो :- बरगी बांध परियोजना के लिए कभी अपना घर-गांव छोड़ने वाले विस्थापित परिवारों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बरगी जलाशय के बढ़ते जलस्तर ने सिवनी, जबलपुर और मंडला जिले के डूब क्षेत्र से लगे दर्जनों गांवों में चिंता बढ़ा दी है। घंसौर तहसील के बीजासेन गांव में जलाशय का पानी घरों तक पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि बच्चों का खेल मैदान भी पानी में डूब चुका है और ग्रामीणों को रात-दिन कच्चे मकानों के गिरने का डर सता रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि घर के दरवाजे तक पानी पहुंच जाने के कारण सामान्य जिंदगी मुश्किल हो गई है। कई स्थानों पर शौचालय भी जलमग्न हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने दैनिक जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
कच्चे मकान गिरने का डर
बीजासेन निवासी चन्नी बर्मन ने बताया कि ग्रामीण दिन-रात डर के साए में रह रहे हैं। लगातार पानी बढ़ने से चिंता बनी हुई है कि कहीं जलभराव के कारण कच्चे मकान धराशायी न हो जाएं।

धन्नू बर्मन ने बताया कि शौच के लिए भी जगह नहीं बची है। गांव में बने शौचालय जलमग्न हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दरवाजे पर पानी, जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
ग्रामीण झनकू साहू ने बताया कि रात के समय घर से बाहर निकलना भी खतरे से खाली नहीं है। दरवाजे तक पानी लगा हुआ है और जलभराव के कारण सांप-बिच्छू सहित जहरीले जीव-जंतुओं के घरों में पहुंचने का खतरा बना हुआ है।

बच्चों के खेल मैदान में पानी, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
पालक शिक्षक संघ अध्यक्ष भुवन बर्मन ने बताया कि गांव का बच्चों का प्लेग्राउंड पूरी तरह पानी में डूब गया है। इससे बच्चों के फिसलने और पानी में डूबने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
विस्थापित संघ ने बांध प्रबंधन पर उठाए सवाल
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया कि विस्थापितों के गांव बरगी जलाशय के अधिकतम भराव स्तर 422.76 फीट से ऊपर बसे हैं। इसके बावजूद जलभराव की स्थिति लगातार गंभीर हो रही है।
सिन्हा का कहना है कि जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र में आने वाले पानी का समय रहते आकलन कर बांध के गेट खोलकर पानी की निकासी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। समय पर जल निकासी नहीं होने के कारण विस्थापित परिवारों को इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
पहले विस्थापन का दर्द, अब जलभराव की मार
विस्थापित संघ का कहना है कि बरगी बांध परियोजना के कारण पहले ही हजारों परिवारों को अपने घर और गांव छोड़ने पड़े थे। विस्थापित परिवारों को पहाड़ियों और वनभूमि के आसपास बसना पड़ा। अब पिछले कुछ वर्षों से अत्यधिक जलभराव के कारण मकानों में पानी भरने और खेतों में खड़ी फसलों के बर्बाद होने की समस्या लगातार सामने आ रही है।
संघ का कहना है कि जिस परियोजना के लिए विस्थापितों ने अपनी जमीन और घर छोड़े, उसी जलाशय का बढ़ता पानी अब उनके वर्तमान आशियानों के लिए भी खतरा बन रहा है।
उच्चस्तरीय जांच और आर्थिक सहायता की मांग
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, भोपाल से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही स्थानीय जिला प्रशासन से प्रभावित गांवों में जलभराव से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
राज कुमार सिन्हा
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ
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