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स्वयं सहायता समूह से बदली कृष्णा पटले की तकदीर, बकरी पालन से बनीं आत्मनिर्भर

  • स्वयं सहायता समूह से बदली कृष्णा पटले की तकदीर, बकरी पालन से बनीं आत्मनिर्भर

Seoni, 30 September 2026
सिवनी यशो:-कुरई विकासखंड के ग्राम खापा की रहने वाली कृष्णा पटले आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। कभी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहीं कृष्णा ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह चुनी और बकरी पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया।

आजीविका मिशन से मिला आत्मनिर्भर बनने का रास्ता

कृष्णा पटले बताती हैं कि उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित ‘जय मां दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद हुई। समूह की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होने के दौरान उन्हें बचत, ऋण और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और खुद का काम शुरू करने का हौसला मिला।

एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया बकरी पालन

परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से कृष्णा ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) के तहत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने बकरी पालन शुरू करने में किया। धीरे-धीरे उन्होंने इस गतिविधि को व्यवस्थित रूप दिया और मेहनत के साथ इसे आय का स्थायी साधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ीं।

बकरी पालन से बढ़ी आमदनी, परिवार हुआ आर्थिक रूप से मजबूत

बकरी पालन में लगातार मेहनत और देखभाल का परिणाम यह रहा कि कृष्णा पटले के परिवार की आजीविका में सुधार आया। उन्हें इससे आमदनी होने लगी, जिससे वे परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने में सक्षम हुईं। व्यवसाय से प्राप्त आय के माध्यम से वे स्वयं सहायता समूह से लिए गए ऋण की किश्तें भी नियमित रूप से चुका रही हैं।

आत्मनिर्भरता ने बढ़ाया आत्मविश्वास

कृष्णा पटले का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी मिला। बकरी पालन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद की।

अपनी सफलता से उत्साहित कृष्णा पटले ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए संचालित योजनाओं और आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकती हैं।

कृष्णा पटले की कहानी यह संदेश देती है कि अवसर, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ आत्मनिर्भरता की नई राह बना सकती हैं।

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