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एडवांटा कंपनी ने किसानों को दिया धोखा, संसद में उठी बात

मानसून सत्र में सांसद ने किसानों एवं आम लोगों की आवाज की बुलंद

सिवनी यशो:- लोकसभा के जारी मानसून सत्र में बालाघाट सिवनी सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन द्वारा नियम 377 के अधीन तेलंगाना की बीज उत्पादक कंपनी एडवांटा द्वारा सिवनी जिले के किसानों को गुणवत्ताहीन अमानक स्तर का मक्का बीज बेचने एवं विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा भूमि स्वामी की सहमति बगैर उनकी भूमि में पोल और ट्रांसफार्मर लगाने का मामला सदन में रखा गया। सदन में रखें गये ये दोनों मामले किसानों एवं आम लोगों से सीधे जुड़े हुये है।
यह जानकारी सांसद के निज सचिव सतीश ठाकरे ने देते हुए बताया कि सांसद डॉ. बिसेन ने लोकसभा सत्र में नियम 377 के अधीन आसंदी का ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि इस वर्ष खरीफ सीजन में सिवनी सहित म.प्र. के अनेक जिलों में किसानों द्वारा तेलंगाना प्रदेश की मक्का बीज उत्पादक कंपनी एडवांटा के अधिकृत स्थानीय वितरकों, दुकानदारों से मक्का बीज खरीदा गया। कंपनी द्वारा किसानों को जो बीज विक्रय किया गया वह अमानक स्तर का होने के कारण उसका अंकुरण नहीं हो पाया। बीज अंकुरित न होने से किसानों को फिर से बीज खरीदना पड़ा और दोबारा बोनी करनी पड़ी। कंपनी के द्वारा बेचे गये अमानक स्तर का बीज के कारण किसानों को न केवल दोबारा बीज खरीदना पड़ा बल्कि खाद, दवाएॅं के साथ साथ दोबारा जुताई का खर्च भी उठाना पड़ा। किसानों द्वारा शिकायत के बावजूद समय पर कोई विभागीय कार्यवाही नहीं की गई। आर्थिक नुकसानी के चलते सिवनी जिले के एक किसान ने आत्मदाह का प्रयास तक किया। डॉ. बिसेन ने आग्रह किया कि अमानक स्तर का बीज सप्लाई करने वाली कंपनी का लायसेंस निरस्त करने के साथ ही जिन किसानों को नुकसान हुआ है उसकी भरपाई मुआवजा के रूप में की जाये।
श्री ठाकरे ने बताया कि किसी तरह सांसद डॉ. बिसेन द्वारा वर्तमान लोकसभा सत्र मेंनियम 377 के अधीन विद्युत वितरण कंपनियों की मनमर्जी का मामला उठाते हुए यह बात रखी गई कि विद्युत कंपनियों द्वारा अपने पोल, ट्रांसफार्मर निजी अथवा शासकीय भूमि में बिना भूमि स्वामी के संज्ञान के उसकी सहमति के बगैर लगा दिये जाते है। विद्युत कंपनी द्वारा इसके एवज में भूमि स्वामी को भूमि अधिग्रहण का न मुआवजा दिया जाता है और न ही किराया। विषम परिस्थिति तब उत्पन्न होती है जब भूमि स्वामी अपनी भूमि के उपयोग हेतु वहां लगे पोल या ट्रांसफार्मर को हटवाना चाहे तो विद्युत कंपनी नहीं हटाती और यदि हटाने को तैयार होती है तो इसके बदले भूमि स्वामी से भारी धन राशि वसूलती है। यहां तक की विद्युत कंपनी शासकीय विभागों से भी शिफ्टिंग के लिए भी राशि लेती है। डॉ. बिसेन ने यह मामला आसंदी के संज्ञान में लाते हुए यह मांग रखी कि विद्युत कंपनिया निजी अथवा शासकीय भूमि में भूमि स्वामी के बगैर अनुमति के पोल एवं ट्रांसफार्मर न लगाये और यदि लगाये तो किराया स्वरूप राशि का भुगतान करें।

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