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2023 विधानसभा चुनाव में केवलारी विधानसभा किस के पक्ष में

सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव का समय बहुत नजदीक आ चुका है और राजनैतिक हलचल भी बढ़ गयी है । सितंबर माह का बीत रहा है अक्टूबर माह के प्रथम या द्वितीय सप्ताह में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता । चुनावी बिगुल राजनैतिक दलों द्वारा फूंक दिया गया है मैदानी स्तर पर राजनैतिक दलों की तैयारी पूरी तरह हो चुकी है । चुनाव लडऩे के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा अपने अपने बायोडाटा पार्टी के उचित मंचों पर भेज दिये गये है । राजनैतिक दलों ने अपने स्तर पर जिताऊ उम्मीदवारों का सर्वे का करा लिया है अपनी संभावनाओं का आंकलन ऊपरी तौर पर करा लिया है । अब उम्मीदवारों को अधिकृत सूची जारी करने को अंतिम रूप दिया जा रहा है भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है दूसरी सूची संभवत: सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में जारी हो जायेगी जबकि कांग्रेस द्वारा अभी तक कोई सूची नहीं की गयी है और पिछले अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद ही जारी होगी ।

संभावित उम्मीदवारों की विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता

विधानसभा चुनाव की तिथियाँ नजदीक आने से चुनावी पारा जिले में बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है । चुनावी समर में अपने जौहर का प्रदर्शन करने वाले संभावित उम्मीदवारों की विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ गयी है अपने कार्यकत्र्ताओं एवं आमजनों से उनका संपर्क अभियान तेज हो गया है हालांकि अभी संभावित दावेदारों का जो संपर्क हो रहा है वह अपनी ही पार्टी के अन्य संभावित दावेदार को कमजोर बताने का और पार्टी से उन्हें उम्मीदवार बनाये जाने की संभावनाओं को बताया जा रहा है । जब तक अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा नहंीं हो जाती तब विधानसभा के संभावित उम्मीदवारों की भागदौड़ समर्थकों के साथ क्षेत्र और नेताओं के पास चलते रहेगी ।
जिले में चार विधानसभाएँ है जिसमें दो सत्ताधारी भाजपा के पास है और दों विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के पास है । पिछले अंको में बरघाट एवं सिवनी विधानसभा क्षेत्रों का विश£ेषण दैनिक यशोन्नति द्वारा प्रकाशित कर दिया गया है आज के अंक में जिले की महत्वपूर्ण विधानसभा केवलारी के बारे में तथ्यात्मक विश£ेषण प्रस्तुत किया जा रहा है हालांकि चुनाव के अंतिम समय तक परिस्थितियाँ बदलने के प्रभावी कारण होते है और सारे विश£ेषण धाराशाही हो जाते है आज जो स्थिती है उसी पर चर्चा की जा रही है संभावनाएँ अनंत होती है स्थितियाँ बदल भी सकती है परंतु मोटा मोटी जो बाते है वह पाठकों के लिये प्रस्तुत है ।

राकेश पाल ने कांग्रेस के अभेद गढ़ पर कब्जा

केवलारी विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश समय कांग्रेस का कब्जा रहा है परंतु वर्तमान में केवलारी विधानसभा में भाजपा का कब्जा है कांग्रेस के अजेय गढ़ में 2018 के चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी राकेश पाल सिंह ने सेंधमारी करने में सफलता प्राप्त की थी और कांग्रेस की सारी रणनीति और रणनीतिकारों को धूल चटा दी थी । जानकारी के अनुसार 2018 के चुनाव में भाजपा के संगठन में भी कोई बहुत कसावट नहीं थी और यहाँ कांग्रेस की ही तूती बोलती थी परंतु राकेश पाल सिंह ने भाजपा से उम्मीदवारी मिलते ही पूरे क्षेत्र के कार्यकत्र्ताओं में बदलाव का वह जुनूर भर दिया दिया कि कांग्रेस सारे प्रयासों के बाद भी बुरी तरह हार गयी । 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे ठाकुर रजनीश सिंह भाजपा के प्रत्याशी राकेश पाल सिंह एक प्रतिशत वोट से हारे थे । जबकि उस समय राकेश पाल सिंह चुनावी रणनीति में पहली बार आये थे और उनका वह पहला अनुभव था और राजनीति क्षेत्र के धुरंधर ठाकुर रजनीश सिंह की राजनैतिक बिसात की हर चाल को उनके चाचा श्री संभाल रहे थे राकेश पाल सिंह के साथ भाजपा के कार्यकत्र्ताओं का विश्वास था और वे उस विश्वास के वैतारणी से चुनावी समर को सफतला के साथ अपने पक्ष में करने सफल रहे । इस विधानसभा से ठाकुर रजनीश सिंह के पिता और मध्यप्रदेश की राजनीति के केन्द्र में रहने वाले स्व. ठाकुर हरवंश सिंह तीन बार विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा में पहुँचे और प्रमुख मंत्रालयों के मंत्री रहे और कांग्रेस की सरकार न बनने पर विधानसभा उपाध्यक्ष रहे वही स्व. हरवंश सिंह की मृत्यु के बाद केवलारी विधानसभा से ठाकुर रजनीश से 2013 विधायक निर्वाचित हुये परंतु कांग्रेस की सरकार फिर प्रदेश में नहीं बनी और वे विधानसभा क्षेत्र में और प्रदेश की राजनीति में वह धमक नहीं बना पाये जो स्व. हरवंश सिंह की थी । 2018 के चुनाव में भाजपा के राकेश पाल सिंह ने उन्हें 6679 वोटों से हरा दिया ।

अनेक प्राथमिकता वाला क्षेत्र है

केवलारी विधानसभा क्षेत्र अनेक विविधताओं वाला विधानसभा क्षेत्र है इस विधानसभा को आसानी से समझ पाना संभव नहीं है । यह विधानसभा क्षेत्र अलग अलग हिस्सों में अलग अलग संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है तो इसकी अलग अलग प्राथमिकताएँ भी । यह कृषि आधारित क्षेत्र है परंतु सभी क्षेत्रों में कृषि की समस्याएँ भिन्न है एकरूपता नहीं है । विधानसभा क्षेत्र का कान्हीवाड़ ा- भोमा वाला भाग गेंहूं उत्पादक के साथ धान का उत्पादन भी समान रूप से करता है । यह भाग व्यापारिक भी है इस क्षेत्र में सामाजिक समीकरण अन्य क्षेत्रों से भिन्न है तो पलारी वाला भाग जो जिले का पंजाब माना जाता है यहाँ गेंहू का बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है इस क्षेत्र में सिंचाई के लिये पानी की प्राथमिकता ही किसानों के लिये प्रमुख समस्या रहती है । यह क्षेत्र धनवानों का क्षेत्र है यहाँ किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जा सकता । यह क्षेत्र किरार ठाकुर का बाहुल्य वाला है जो आपसी रिश्तेदारी से एक दूसरे से जुड़ा हुआ है । केवलारी का क्षेत्र भी इसी प्रकार है परंतु यहाँ किसानों को सिंचाई के पानी की समस्या बनी रहती है शिक्षा और रोजगार की समस्या इस क्षेत्र के लिये विशेष रूपी से रहती है यह क्षेत्र भी लोधी और बघेल समाज की बाहुल्यता वाला है । उगली वाला क्षेत्र धान उत्पादक क्षेत्र है यहाँ जाति समीकरण के हिसाब से पवार एवं मरार समाज की बाहुल्यता वाला क्षेत्र है यहाँ की अपनी प्राथमिकताएँ है । धनौरा आदिवासी बाहुल्य वाला क्षेत्र है मोटे अनाज की खेती यहाँ बड़ी मात्रा में होती है । इसी प्रकार छपारा वाला क्षेत्र आदिवासी एवं ठाकुर समाज की बाहुल्यता वाला क्षेत्र है यहाँ की अपनी प्राथमिकता है । हर क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के वजनदार नेता है परंतु सर्वव्यापकता वाले नेताओं का दोनो ही दलों में आभाव है ।
यह विधानसभा चुनाव किस पार्टी के पक्ष में जायेगा इसका अनुमान लगाना बहुत कठिन है परंतु यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है कि भाजपा में भले ही अभी दावेदारी करने वालों के कारण आसंतोष जैसी स्थिती दिखाई दे रही हो अधिकृत प्रत्याशी घोषित होते ही सारा विरोधाभास समाप्त हो जायेगा और भाजपा ने अपने संगठन की भी इस बार मजबूत कसावट की जबकि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा बहुत मजबूत नहीं है और न ही कांग्रेस ने इस क्षेत्र में कोई विशेष ध्यान दिया । इस क्षेत्र में प्रत्याशी संबंधी और अन्य निर्णयक पहलू है जिसके संबंध में आगामी अंक में प्रकाशन किया जायेगा ।

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