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केवलारी में स्थानीय की मांग के बावजूद राकेश पाल भारी

सिवनी यशो:- केवलारी विधानसभा के लिये यह बात बिल्कुल नई बात नहीं है कि चुनाव नजदीक आते ही यहाँ कांग्रेस और भाजपा की ओर से स्थानीय प्रत्याशी का मांग उठती है परंतु स्थानीय ऐसा कोई प्रत्याशी नहीं होता जो पूरे विधानसभा क्षेत्र में अपना व्यापक प्रभाव रखता हो और यही कारण रहता है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों राजनैतिक दल विधानसभा क्षेत्र से बाहर के व्यक्ति को प्रत्याशी बनाते रहे है । स्व. हरवंश सिंह इस विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक निर्वाचित हुये परंतु वे दो विधानसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र से बाहर के प्रत्याशी माने जाते थे हालांकि तीसरे विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने अपने गृह ग्राम बर्रा को 2008 में परिसीमन के दौरान केवलारी विधानसभा में शामिल करा लिया था और 2008 के चुनाव में भाजपा ने डाँ. ढालसिंह बिसेन को प्रत्याशी बनाया था । 2023 के विधानसभा चुनाव में ठाकुर हरवंश की मृत्यु के बाद स्व. हरवंश के सुपुत्र ठाकुर रजनीश को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया परंतु भाजपा ने केवलारी विधानसभा में पुन: डां. ढालसिंह बिसेन को प्रत्याशी बनाया और यहाँ भाजपा स्थानीय प्रत्याशी की मांग करते रही । २०१८ के चुनाव में कांग्रेस ने ठाकुर रजनीश सिंह को दूसरी बार प्रत्याशी बनाया वहीं भाजपा ने इस क्षेत्र से भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष राकेश पाल सिंह को प्रत्याशी बनाया और राकेश पाल सिंह ने पार्टी के अंदर के सारे विरोध को शांत करते हुये चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुये कांग्रेस के इस अजेय गढ़ को धराशाही कर दिया ।
2023 के चुनाव के लिये केवलारी विधानसभा में अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार स्थानीय प्रत्याशी की मांग को लेकर पुन: तूफान खड़ा हुआ है । हालांकि स्थानीय प्रत्याशी की मांग अब केवल भाजपा के पास बची है कांग्रेस ने अपनी इस बीामरी का उपचार कर लिया है । भाजपा की ओर से जो मांग चल रही है वह प्रायोजित तरीके से चल रही है । इस प्रकार की मांग करने वाले अधिकांश वहीं व्यक्ति होते है जो हर चुनाव के समय इस प्रकार की मांग कर पार्टी को हलाकान करते है परंतु स्थानीय नेतृत्व इतना प्रभावी खड़ा नहीे करते जिसका पूरी विधानसभा में व्यापक प्रभाव हो ।

क्षेत्र में व्यापक प्रभाव वाले भाजपाई नेताओं का आभाव

भाजपा की ओर से उठने वाली स्थानीय प्रत्याशी की मांग हमेशा कमजोर हो जाने का मुख्य कारण हमेशा यही रहा है कि स्थानीय कोई भी प्रत्याशी पूरे विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रभाव नहीं रखता और इसके पीछे जो मुख्य कारण होता है वह विधानसभा क्षेत्र के अलग अलग क्षेत्रों की भिन्नता होती है । यहाँ बता दें कि केवलारी विधानसभा क्षेत्र अनेक क्षेत्रों में बंटा हुआ है सभी क्षेत्रों के जातिगत समीकरण और क्षेत्रों की प्राथमिकताएँ भिन्न है ।

भाजपाई ही भाजपा की परेशानी

यहाँ एक बात और भी ऐसी है जो बड़ी विचित्र रहती है इस क्षेत्र के क्षेत्रीय नेताओं की मानसिकता विरोध की ही रहती है जिसका मुख्य कारण यह भी बताया जाता है कि यहाँ अधिकांश कालखंड कांग्रेस विधायक का रहा है और भाजपा हमेशा में विरोध में ही रही है इस लिये यहाँ के नेता स्वाभाव से ही विरोधी रहते है उन्हें इस बात का भान भी नहीं रहता कि वे सत्ता में आ गये है और कुछ व्यक्ति ऐसे विरोध में वे भी शामिल हो जाते है जो कांग्रेस को लाभ पहुँचाने के लिये कांग्रेस से सांठगांठ रखते है । केवलारी विधानसभा से भाजपा के निर्वाचित विधायक राकेश पाल सिंह अपने कार्यकाल के दौरान विरोधी राजनैतिक दल कांग्रेस से कम परेशान रहे है भाजपाई विरोध से उन्हें काफी परेशान रहना पड़ा है । केवलारी नगर परिषद के चुनाव में सबसे अधिक परेशानी भाजपाईयों से हुई और अध्यक्ष निर्वाचन के समय भाजपाई पार्षद तक एकमत नहीं हुये यहाँ भाजपा की आपसी कलह अभी भी सड़को पर है और बताते है कि यह सब प्रायोजित है ।

कांग्रेस को टक्कर राकेश पाल ही दे सकते है

बताते है कि केवलारी विधानसभा के लिये कांगे्रस की ओर से लगभग ठाकुर रजनीश सिंह की उम्मीदवारी पक्की है वहीं भाजपा से भी लगभग राकेश पाल सिंह की उम्मीदवारी मजबूत है परंतु भाजपा की ओर से स्थानीय प्रत्याशी की मांग ने मामले को उलझा दिया है और वर्तमान विधायक श्री पाल को चिंता में डाल दिया है हालांकि आम जनों में चर्चा है कि चुनाव के परिणाम चाहे जो हो परंतु कांग्रेस को सबसे कड़ी टक्कर राकेश पाल ही दे सकते है । भाजपा के सामान्य कार्यकत्र्ताओं का कहना है कि केवलारी विधानसभा में राकेश पाल सिंह ने पूरे पांच साल पूरी क्षमता के साथ काम किया है और क्षेत्र की हर समस्याओं के समय क्षेत्र की जनता के साथ खड़े रहे है किसी भी अवसर पर कांग्रेस को विरोध करने या राजनीति करने का अवसर नहींं दिया वहीं केवलारी के विधायक राकेश पाल जहाँ पूरे कार्यकाल के दौरान सक्रिय रहे वहीं कांग्रेस पूरे पाँच साल निष्क्रिय रहे । भाजपा से निर्वाचित विधायक राकेश पाल सिंह ने अपने निर्वाचन के पश्चात ही भाजपा कार्यकत्र्ताओं को जुझारू बनाने और संगठन के कार्यकत्र्ताओ को प्राथमिकता देकर अपनी संगठनात्मक पूंजी की ताकत बढाई है ।
फिलहाल भाजपा की ओर से वर्तमान विधायक राकेश पाल सिंह के अलावा अन्य जो नाम चर्चा में है उनमें पूर्व सांसद श्रीमती नीता पटेरिया, भाजपा जिला महामंत्री गजानंद पंचेश्वर, श्रीराम ठाकुर, समीर ठाकुर, जयदीप सिंह चौहान सहित अन्य नाम शामिल है परंतु वर्तमान समय में जो सबसे उपयुक्त और जिताऊं राकेश पाल सिंह को माना जा रहा है । भाजपा

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