बिलगांव प्राथमिक शाला बनी खतरे का घर: जर्जर भवन में जान जोखिम में डाल पढ़ रहे मासूम
छत पर पन्नी, दीवारों से झड़ता प्लास्टर—'स्कूल चलें हम' के दावों की जमीनी हकीकत उजागर
बिलगांव स्कूल जर्जर भवन
Mandla 29 April 2026
मंडला यशो:-प्रदेश सरकार के “बेहतर शिक्षा” और “स्कूल चलें हम” जैसे दावे जमीनी हकीकत के सामने बौने साबित हो रहे हैं। बिलगांव की शासकीय प्राथमिक शाला की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जान हर दिन खतरे में है।

स्कूल या खतरे का ढांचा?
स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत की खपरैल टूट चुकी है, जिस पर प्लास्टिक की पन्नियां डालकर काम चलाया जा रहा है।
👉 दीवारों से प्लास्टर झड़ रहा है
👉 छत के बीम और पटिए कभी भी गिर सकते हैं
यह हालात किसी बड़े हादसे की चेतावनी दे रहे हैं।
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खुले में पढ़ने को मजबूर बच्चे
भवन इतना असुरक्षित है कि बच्चे कक्षाओं के अंदर बैठने से डरते हैं।
👉 बरामदे और खुले स्थान पर जमीन पर बैठकर पढ़ाई
👉 बरामदे की छत में भी सीपेज और गड्ढे
सवाल उठता है—क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
गंदगी और बदहाली का अड्डा बना परिसर
स्कूल परिसर में चारों ओर गंदगी, जलजमाव और झाड़ियां फैली हुई हैं।
👉 जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
👉 बुनियादी सुविधाओं का अभाव
शिक्षा का मंदिर खुद बदहाली का प्रतीक बन गया है।
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जिम्मेदारों का बयान
जिला शिक्षा समन्वयक कुलदीप कटहल ने बताया कि
👉 “निर्माण समिति से विचार कर भवन के रखरखाव का इंतजाम जल्द किया जाएगा।”
सबसे बड़ा सवाल
क्या बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा है?
अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।



