10 दिन में चौथी मौत: कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का सिलसिला, प्रबंधन कटघरे में
लगातार हो रही मौतों से दहशत—क्या ‘टाइगर स्टेट’ में अब सुरक्षित नहीं बाघ?
कान्हा टाइगर रिजर्व बाघ मौत – 10 दिन में 4 मौत, क्या ‘टाइगर स्टेट’ का ताज अब खतरे में है?
Mandla 29 April 2026
मंडला यशो:- मध्यप्रदेश के गौरव कान्हा टाइगर रिजर्व से आ रही लगातार बाघों की मौत की खबरों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की नींव हिला दी है। ताजा मामले में मादा बाघिन ‘अमाही’ (T-141) की मौत हो गई—और यह महज 10 दिनों में चौथी मौत है।
10 दिन में 4 मौतें—सवालों के घेरे में सिस्टम
- 21 अप्रैल: शावक की मौत
- 24 अप्रैल: दूसरे शावक की मौत
- 26 अप्रैल: तीसरे शावक की मौत
- आज: मादा बाघिन T-141 की मौत
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एक ही परिवार के चार सदस्यों की महज कुछ दिनों में मौत ने वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

9 महीनों में 16 वन्यजीवों की मौत
आंकड़ों के अनुसार पिछले 9 महीनों में 11 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ते ये आंकड़े वन्यजीव संरक्षण के दावों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
इलाज या औपचारिकता?
बताया जा रहा है कि मादा बाघिन बीमार थी और उसका इलाज क्वारंटीन सेंटर में चल रहा था। लेकिन जब एक के बाद एक मौतें हो रही हों, तो सवाल इलाज की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर उठना स्वाभाविक है।
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पर्यटन चमक रहा, जंगल सिसक रहा?
कान्हा टाइगर रिजर्व देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, लेकिन जिस गति से यहां बाघों की मौत हो रही है, वह चिंताजनक है। क्या वन विभाग केवल पर्यटन प्रबंधन तक सीमित रह गया है?

सबसे बड़ा सवाल
क्या ‘टाइगर स्टेट’ का तमगा अब खतरे में है? अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में जंगलों में सन्नाटा और आंकड़ों में सिर्फ मौतें दर्ज रह जाएंगी।
रिपोर्ट: दैनिक यशोन्नति डेस्क




