सिवनी यशो:- सनातनी श्रद्धा के अनुसार पूर्वजो के प्रति सम्मान देने के पखवाड़े में सनातन धर्मवालंबियों ने पूर्वजो के प्रति भक्ति भाव से तर्पण कर उन्हें आदरांजलि दी कुछ व्यक्तियों ने अपने घरों में तर्पण किया तो अनेक व्यक्ति जलाशयों में पहुँचकर श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजो को पानी देते रहे । सिवनी नगरीय क्षेत्र के समीप पवित्र बैनगंगा नदी में अनेक सनातनी व्यक्तियों ने पूरे पखवाड़े तर्पण क्रिया को किया आज पितृमोक्ष अमावस्या के पवित्र पर्व पर लखनवाड़ा वैनगंगा नदी तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचे जहां उन्होंने पितरों को विदाई देते हुए पवित्र वैनगंगा नदी में काली तिल व अन्य सामग्री नदी में प्रवाहित करते हुए दीपदान किया।
पितृ पक्ष के दौरान पितरों का श्राद्ध करने से जीवन में आने वाली बाधाएं परेशानियां दूर होती हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
उपेन्द्र शास्त्री ने बताया कि पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि देवपूजा से पहले जातक को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि अगर, विधिनुसार पितरों का तर्पण न किया जाए तो उन्हें मुक्ति नहीं मिलती है। पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का यह पवित्र एक पखवाड़े का होता है जिसमें पितरों की मुक्ति के लिये अनेक धार्मिक कृत्य किये जाते है ।



