नर्मदा संरक्षण का मेगा प्लान: ‘नमन मिशन’ से बदलेगी पूरी घाटी, हर महीने खुद समीक्षा करेंगे सीएम मोहन यादव
नमन मिशन' से नर्मदा को निर्मल-अविरल बनाने की तैयारी, अमरकंटक में बनेगा जैव विविधता प्रबंधन संस्थान
सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला, नर्मदा संरक्षण के लिए बनेगा नर्मदा ‘नमन मिशन’
Bhopal 02 July 2026
भोपाल यशो :- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की समीक्षा बैठक में कहा कि मां नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस नदी एवं इसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। उन्होंने नर्मदा को निर्मल और अविरल बनाए रखने, नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त करने तथा नदी संरक्षण के लिए व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हर माह नर्मदा समग्र की समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि नदी संरक्षण और विकास से जुड़े कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो सके।
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उन्होंने नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं, संकेतक बोर्ड, धार्मिक स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाने और आवश्यक स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए।
18 जिलों में नर्मदा जयंती पर होंगे विशेष आयोजन
बैठक में बताया गया कि नर्मदा तटवर्ती 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर भव्य आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, प्रतियोगिताएं और जन-जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।
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युवाओं को नदियों के संरक्षण अभियान से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
‘नमन मिशन’ से होगा समग्र विकास
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा तैयार ‘नमन मिशन’ के माध्यम से नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री इस मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। मिशन के संचालन के लिए वर्ष 2026-27 का रोडमैप तैयार किया गया है तथा राज्य सरकार की ओर से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रस्ताव रखा गया है।
अमरकंटक में बनेगा जैव विविधता प्रबंधन संस्थान
वन विभाग ने बैठक में जानकारी दी कि नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में 32 लाख रुपये की लागत से जैव विविधता प्रबंधन संस्थान स्थापित किया जाएगा। साथ ही नर्मदा घाटी क्षेत्र में लगभग 415 हेक्टेयर क्षेत्र में 2.70 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
35 एसटीपी और नर्मदा कोष पोर्टल की तैयारी
नगरीय विकास विभाग ने बताया कि नर्मदा तट के 21 नगरों में 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इसके अलावा नर्मदा कोष पोर्टल विकसित किया जा रहा है तथा ओंकारेश्वर के विकास के लिए स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) गठित करने की तैयारी है।



