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भाजपा स्वयं के विकास और विस्तार में जुटी, जनता भगवान भरोसे: सोनू मागो
जर्जर हो चुकी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर नहीं सरकार का ध्यान, सत्ता में आते ही स्वयं और पार्टी के विकास पर दे रहे जोर
छिन्दवाड़ा यशो:- डेंगू जैसी गम्भीर बीमारी ने जिले की अधिकांश आबादी को अपनी चपेट में ले लिया है। गांव, कस्बे, मंजरे व टोलों के साथ ही अब जिला मुख्यालय पर भी इस गम्भीर बीमारी से पीडि़तों व मृतकों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही। डेंगू की रोकथाम व पीडि़तों को उपयुक्त उपचार नहीं मिलना भाजपा सरकार व उसके स्थानीय जिम्मेदारों की नाकामी को दर्शा रहा है। उक्त उदगार आज निगम अध्यक्ष सोनू मागो ने अपनी जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार पर्याप्त ऑक्सीजन, आवश्यक दवाइयां व उपकरण उपलब्ध कराने में नाकाम रही तो थाली व ताली बजवाई, तब मप्र के तात्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ व जिले के तात्तकालीन सांसद नकुलनाथ ने भरपूर ऑक्सीजन की व्यवस्था की, सभी तरह की आवश्यक व जीवनवर्धक दवाइयां एवं उपकरण उपलब्ध करायें। यही नहीं नेताद्वय ने दलगत राजनीति से उठकर प्रदेश के अन्य जिलों को भी ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई। वर्तमान की परिस्थितियों पर नजर डालें तो केन्द्र व राज्य में भाजपा की सरकार, स्थानीय जिम्मेदार होने के बावजूद डेंगू जैसी बीमारी से आम लोगों की असमय मौत होना। बीमारी की रोकथाम हेतु सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाना यह साबित कर रहा है कि भाजपा स्वयं के विस्तार एवं अपनी पार्टी के नेताओं के विकास पर केन्द्रित हो चुकी है।
विगत एक सप्ताह में दो लोगों की मौत:-
निगम अध्यक्ष ने आगे कहा कि डेंगू से विगत एक सप्ताह में दो लोगों की मौत हो चुकी है और इसके पूर्व में भी कुछ लोग डेंगू के शिकार हो गये यह बेहद चिंताजनक है। विभाग बीमारी की रोकथाम से अधिक मौत के आंकड़ों को छिपाने व अन्य बीमारी से मौत होना बताने में जुटा है, जैसे भाजपा के दबाव में कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों को छिपाया गया था, वही हालात पुन: उत्पन्न हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग में मनमानी का दौर चल रहा है, क्योंकि जिन्होंने जनसेवा का ढिंढोरा पीटा था अब वे स्वयं के साथ ही पार्टी व पार्टी नेताओं की सेवा में जुटे हैं और जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है।
शासकीय अस्पतालों में जांच की सुविधायें नहीं है। आम जनता निजी जांच केन्द्रों में लुट रही है। सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं हो रहा तो पीडि़त निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर है, क्योंकि वर्तमान में सरकारी अस्पतालों को ही इलाज की आवश्यकता है।



