धर्मविचारसिवनी

good morning thoughts : संघर्ष का दूसरा नाम जीवन है

      कर्म की पूजा ही मानव का वास्तविक धर्म है। कर्म से शक्ति, पौरुष, साहस एवं तेजस् की उपलब्धि होती है। एक कहावत प्रचलित है- “ईश्वर उनकी ही सहायता करता है, जो अपनी सहायता आप करते हैं।” वस्तुतः दैव को दुर्बलता का घातक बताकर शास्त्रकारों ने एक कटु सत्य का ही उद्घाटन किया है।
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       शक्ति की उत्पत्ति अवरोध से होती है। नदी का प्रवाह वहीं तीव्र होता है, जहांँ चट्टानों, पहाड़ों द्वारा गति अवरोध उत्पन्न किया जाता है। मैदानी नदियों का प्रवाह तीव्र नहीं होता। अवरोध और घर्षण के सिद्धान्त पर बिजली की शक्ति का उद्भव होता है।
       धनुष की डोरी जब तनती है, तब उसमें तीर को दूर फेंकने की शक्ति आती है। यदि डोरी ढीली पड़ी रहे, तो तीर फेंकने का काम जरा भी न हो सकेगा। वैज्ञानिकों, योगियों एवं आत्मवेत्ताओं ने भी अगणित सिद्धियांँ प्राप्त की है, उन सबका श्रेय मन को रोककर एक दिशा में लगाए रहने की सफलता में ही सहित हैं।
       संघर्ष का ही दूसरा नाम जीवन है। जहांँ सक्रियता समाप्त हुई, वहांँ जीवन का अन्त समीप समझिए। आलसी, अकर्मण्यों को जीवित अवस्था में भी मृत की संज्ञा दी जाती है।
       जिसने पुरुषार्थ के प्रति अनास्था व्यक्त की, वह जीवन के प्रति आस्था ही खो बैठा। मनुष्य की सच्ची वीरता युद्ध के मैदान में दुश्मनों को पराजित करने में नहीं, बल्कि मनोशक्ति के द्वारा अपनी वासनाओं और तृष्णाओं के हनन करने में निहित है।

Dainikyashonnati

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