लोकार्पण के तीन दिन बाद ही बह गई करोड़ों की सड़क, पहली बारिश ने खोली निर्माण तंत्र की पोल
मुख्यमंत्री के वर्चुअल लोकार्पण के बाद ध्वस्त हुआ मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग, करोड़ों की परियोजनाओं पर उठे सवाल; ग्रामीण बोले– आखिर जिम्मेदार कौन?
मोहबर्रा सारसडोल सड़क – पहली बारिश में बह गई 3.94 करोड़ की सड़क
Seoni 04 July 2026
सिवनी यशो:- करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद यदि कोई सड़क पहली ही बारिश का मामूली बहाव नहीं झेल पाए तो इसे विकास नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल माना जाएगा।
केवलारी विधानसभा क्षेत्र के उगली के समीप मोहबर्रा से सारसडोल के बीच लगभग 3 करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से निर्मित दो किलोमीटर लंबी सड़क पहली ही बरसात में कटकर बह गई।

सड़क टूटने से दोनों गांवों के बीच आवागमन बाधित हो गया है और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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इस घटना ने केवल सड़क निर्माण की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य के तकनीकी परीक्षण, विभागीय निरीक्षण और करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की मॉनिटरिंग पर भी बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि 1 जुलाई 2026 को सिवनी जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिन तीन ग्रामीण सड़कों का वर्चुअल लोकार्पण किया था,
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उनमें मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग भी शामिल था। लोकार्पण के महज तीन दिन बाद सड़क का इस तरह बह जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्षेत्र में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिना समुचित तकनीकी परीक्षण के परियोजनाओं का लोकार्पण कराया गया?
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करीब 10 करोड़ की तीन परियोजनाओं पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री द्वारा वर्चुअल लोकार्पण की गई परियोजनाओं में—
- मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग (2 किमी) — ₹3.94 करोड़
- जेवनारा–पांडिया छपारा मार्ग (3 किमी) — ₹3.42 करोड़
- मलारी–पौंडी मार्ग (2 किमी) — ₹2.42 करोड़
कुल मिलाकर लगभग 9.78 करोड़ की लागत की इन परियोजनाओं को विकास की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया था।

लेकिन मोहबर्रा–सारसडोल मार्ग की हालत ने इन परियोजनाओं की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।
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200 मीटर पहले टूटी सड़क, ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित
जिस स्थान पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण कार्य चल रहा है, उससे करीब 200 मीटर पहले बनी छोटी पुलिया के पास बारिश के बहाव में सड़क कट गई।
सड़क टूटने से मोहबर्रा और सारसडोल के बीच आवागमन प्रभावित हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस, स्कूली बच्चों और किसानों को अब वैकल्पिक मार्ग तलाशना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप— नाली नहीं बनी, खेत और घर डूबे
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप बारिश का पानी खेतों और मकानों में घुस गया।
कई किसानों का कहना है कि पानी के तेज बहाव से उनके खेतों में बने तालाब टूट गए और खरीफ की फसल को नुकसान पहुंचा है।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई और गुणवत्ता से समझौता किया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
ठेकेदार का पक्ष
निर्माण एजेंसी के ठेकेदार आशीष जायसवाल ने कहा कि सड़क का निर्माण स्वीकृत एस्टीमेट के अनुरूप किया गया है।
उनके अनुसार सड़क के किनारे नाली निर्माण का प्रावधान नहीं था तथा पुल का निर्माण अभी प्रगति पर है। उन्होंने क्षति को प्राकृतिक कारणों से हुई घटना बताया।
विधायक और अधिकारियों से संपर्क का प्रयास
ग्रामीणों के बीच यह आरोप भी चर्चा में है कि निर्माण कार्य में लापरवाही के बावजूद समय से पहले लोकार्पण कराया गया।
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इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक ठाकुर रजनीश सिंह तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया,
लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अब जवाब मांग रहे हैं लोग
- करोड़ों रुपये की सड़क पहली ही बारिश में क्यों बह गई?
- क्या गुणवत्ता परीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहा?
- यदि निर्माण कार्य पूरी तरह तैयार नहीं था, तो लोकार्पण क्यों हुआ?
- सड़क टूटने से प्रभावित ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- नुकसान की भरपाई और दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
अब निगाहें प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग पर हैं कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जनता के करोड़ों रुपये के उपयोग का हिसाब देता है या नहीं।
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स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्र के कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई तथा संबंधित ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण गुणवत्ता से समझौता किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।



