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good morning thoughts: आत्म-निरीक्षण से जीवन पवित्र और निर्मल बना रहता है

चूहे को पकड़ने के लिए बिल्ली बहुत धीरे-धीरे कदम बढ़ाती है और मछली को निगलने के लिए बगुला बहुत ही सावधानी से पाँव धरता है और जब अपने शिकार को बेखबर देखा कि उसे चट कर जाते हैं।

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फिर उनके मुँह में से निकल भागना मछली या चूहे के लिए बहुत कठिन होता है। मनुष्य के हृदय में पाप वृत्तियाँ जब प्रवेश करती है, तो बहुत धीरे-धीरे आती है और उनका आगमन ऐसी मन्द गति से होता है, कि हमें उनका पता भी नहीं लग पाता और जब वे पूरी तरह कब्जा कर लेती है, तब कुछ ज्ञान होता है।
असंख्य भले आदमी बुराइयों के शिकार हो जाते हैं। पहले उनके हृदय बहुत शुद्ध थे, वे पापों से घृणा करते थे, किन्तु जब उनके मन में धीरे-धीरे दुष्ट प्रवृत्तियाँ घुसने लगी, तो वे जागरूक नही थे, वे बेहोशी में पड़े रहे।
इधर वे विकार मन में धीरे-धीरे बढ़ते रहें, परिणाम यह हुआ कि एक दिन उनके समस्त गुणों को हटाकर बुरे विचारों ने अपना कब्जा कर लिया।

वे मन ही मन पुराने अच्छे जीवन को प्राप्त करने के लिए तड़पते हैं, पर लाचार हैं। बुरी आदतों ने उनके ऊपर अपना पूरा अधिकार कर लिया है, पूरी तरह गुलाम बना लिया है।
इसीलिए जो व्यक्ति अपने जीवन को पवित्र और निर्मल बनाये रखना चाहते हैं, वे प्रतिदिन सोने से पूर्व आत्म-निरीक्षण कर लिया करें।
आज क्या बुराई हमने की? आज क्या बुरे विचार हमारे मन में आये? इन दोनों प्रश्न के उत्तर खूब बारीकी से ढूँढने चाहिए और जो बुराइयाँ हुई हों, उनके लिए ईश्वर से क्षमा माँगते हुए दूसरे दिन सावधान रहने की प्रतिज्ञा करनी चाहिये।

इस प्रकार यदि रोज आत्म-निरीक्षण का क्रम जारी रखा जाय, तो हम उन समस्त पापों से बच सकते हैं, जो पहले चुपके-चुपके आते हैं और अन्त में नष्ट कर डालते हैं।

Dainikyashonnati

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