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धर्मविचारसिवनी

good morning thoughts : महारथी

  मन अर्जुन के समान है जिस प्रकार युद्ध में चारों तरफ एक से बढ़कर एक महारथी थे, उसी प्रकार मन के अंदर जो विषय विकार हैं यह सब एक से बढ़कर एक महारथी हैं जो किसी हाल में मन को अपने से ऊपर उठने नहीं देना चाहते।
मन ज्ञान का सहारा लेकर इन विषय विकार रूपी शत्रुओं से युद्ध करता हुआ आगे निकल जाता है। यह शत्रु ऐसे हैं जो एक बार परास्त होने के बाद आपकी सेवा में लग जाते हैं। आपकी राह में कभी किसी प्रकार का विघ्न नहीं डालते हैं और सारे महारथी अपना पूर्ण सहयोग देकर मन को आत्मा से मिला देते हैं तब जाकर मनुष्य का लक्ष्य पूरा होता है।
good morning thoughts : महारथी - Seoni News
        संसार रूपी कुरुक्षेत्र से विजय प्राप्त होती है इन पर विजय प्राप्त करने के लिए ज्ञान और भक्ति ही एकमात्र सहारा है इतने शत्रुओं के बीच हमारा मन युद्ध करते-करते अपने मुख्य लक्ष्य को ही भूल गया है। शत्रुओं में इस प्रकार उलझ गया है कि वह खुद को ही भूल गया है ज्ञान रूपी कृष्ण उसको उसके उद्देश्य का ज्ञान कराते हैं और आत्मा रूपी विजय प्राप्त कराते हैं, हमारा मन इन विषय विकार रूपी शत्रुओं में तब तक ही उलझा रहता है जब तक ज्ञानरूपी कृष्ण का सहारा नहीं मिलता है जिस दिन ज्ञान रूपी कृष्ण का सहारा मिलता है हमारा मन युद्ध करने को या यूं कहिए विषय विकार रूपी शत्रुओं को पराजित करने के मार्ग में आगे बढ़ने लगता है।
 जिस प्रकार युद्ध क्षेत्र में अस्त्र शस्त्र का अधिक मान होता है उसी प्रकार आंतरिक युद्ध लड़ने के लिए ज्ञान ही मुख्य शास्त्र माना गया है बिना ज्ञान की कोई भी आंतरिक युद्ध में विजय प्राप्त नहीं कर सकता है।
 बाहरी युद्ध में शरीर मरता है और आंतरिक युद्ध में मन, बुद्धि और अहम से उठने वाले विषय विकार मर जाते हैं इसका अर्थ है पूर्ण रूप से शांत हो जाते हैं फिर कभी आपको परेशान नहीं करते हैं फिर कभी आप को विवश नहीं करते हैं और आपका मार्ग सहज ही आसान हो जाता है। इसलिए अर्जुन की तरह इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए श्रीकृष्ण का सहारा लेना ही पड़ेगा और वह श्री कृष्ण हमारी आत्मा में विराजमान है जिन से उत्पन्न सारा ज्ञान हमें इस संसार रूपी चक्रव्यूह से पार करा देगा ?

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