वसूली आदेश के बाद भी 1.90 लाख का भुगतान! ग्राम पंचायत कत्ती में वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाने की मांग
62 लाख रुपये के कथित आहरण का आरोप, बैंक स्टेटमेंट के साथ कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ तक पहुंचा मामला; सरपंच-सचिव की डीएससी दोबारा सक्रिय करने पर भी उठे सवाल
ग्राम पंचायत कत्ती में 62 लाख के आहरण पर सवाल, जांच की मांग
सिवनी यशो :- जनपद पंचायत घंसौर की ग्राम पंचायत कत्ती में निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेनदेन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। वसूली आदेश जारी होने के बाद भी भुगतान किए जाने के आरोपों ने पंचायत की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत के पंचों एवं ग्रामीणों ने कलेक्टर सिवनी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सिवनी को आवेदन सौंपकर सरपंच एवं सचिव के वित्तीय लेनदेन अधिकारों पर रोक लगाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
आवेदकों का आरोप है कि जब पंचायत में निर्माण कार्यों की कथित अनियमितताओं को लेकर वसूली के आदेश जारी हो चुके हैं, तब संबंधित वित्तीय गतिविधियों की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया की जांच क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों ने भुगतान अभिलेखों, बैंक स्टेटमेंट और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
वसूली आदेश जारी, लाखों की वसूली का मामला
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सिवनी के न्यायालय द्वारा 1 अक्टूबर 2026 को ग्राम पंचायत कत्ती में निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं एवं घटिया निर्माण से संबंधित मामले में वसूली आदेश जारी किए गए।
आवेदन के अनुसार, सरपंच श्रीमती सुमन कुमरे से 2 लाख 22 हजार 200 रुपये, तत्कालीन सचिव जयंत मरकाम से 2 लाख 22 हजार 200 रुपये तथा उपयंत्री राकेश कोसले और तत्कालीन सहायक यंत्री राजुल नामदेव से 2 लाख 500-2 लाख 500 रुपये की वसूली के आदेश जारी किए जाने का उल्लेख है।
ग्रामीणों का कहना है कि वसूली आदेश जारी होने के बाद पंचायत के वित्तीय लेनदेन की स्थिति की समीक्षा आवश्यक थी। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने और मामले की जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की है।
आदेश के चार दिन बाद 1.90 लाख रुपये के भुगतान का दावा
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल 5 अक्टूबर 2026 को किए गए कथित भुगतान को लेकर उठाया गया है। आवेदन में दावा किया गया है कि 1 अक्टूबर को वसूली आदेश जारी होने के महज चार दिन बाद ग्राम पंचायत से 1 लाख 90 हजार 18 रुपये का भुगतान किया गया।
ग्रामीणों ने इस भुगतान के उद्देश्य, स्वीकृति, संबंधित कार्यों की स्थिति और भुगतान प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। उनका सवाल है कि वसूली संबंधी कार्रवाई के बीच यह भुगतान किन परिस्थितियों में किया गया और इसके लिए किन अभिलेखों एवं स्वीकृतियों का सहारा लिया गया?
हालांकि, भुगतान से संबंधित दस्तावेजों और विभागीय अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि के बाद ही इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बिना काम कराए 62 लाख रुपये निकालने का आरोप
आवेदन में ग्राम पंचायत कत्ती से जुड़े प्रकरण के जिला पंचायत सीईओ के न्यायालय में पंजीबद्ध होने के बाद से लगभग 62 लाख रुपये का कथित तौर पर बिना कार्य कराए आहरण किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदकों ने इस संबंध में बैंक स्टेटमेंट संलग्न किए जाने की बात कही है।
यदि इस आरोप की पुष्टि होती है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि संबंधित राशि किन कार्यों के लिए निकाली गई, भुगतान किन व्यक्तियों या एजेंसियों को किया गया और मौके पर निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है।
इसलिए बैंक लेनदेन का मिलान, मस्टर रोल एवं बिल-वाउचर की जांच, निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन और संबंधित अधिकारियों के अभिलेखों का परीक्षण मामले की वास्तविकता सामने लाने में अहम साबित हो सकता है।
सचिव का वित्तीय प्रभार बदलने के आदेश के बाद डीएससी पर सवाल
आवेदन में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु 23 अप्रैल 2026 को जारी आदेश क्रमांक 439 से जुड़ा है। आवेदकों के अनुसार, कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सिवनी द्वारा जारी इस आदेश में वर्तमान सचिव फूलभान शाह पन्द्रे से वित्तीय प्रभार हटाकर सचिव रितेश चौकसे को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में सरपंच एवं सचिव के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) दोबारा सक्रिय कर दिए गए, जिसके बाद पंचायत से भुगतान भी किया गया।
अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि वित्तीय प्रभार संबंधी आदेश के बाद डीएससी किस प्रक्रिया और किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से दोबारा सक्रिय की गईं? क्या संबंधित आदेशों और वित्तीय अधिकारों की स्थिति की समीक्षा की गई थी? आवेदकों ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत के पंचों एवं अन्य आवेदकों ने कलेक्टर सिवनी तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सिवनी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। संबंधित बैंक खातों, भुगतान अभिलेखों, डीएससी के उपयोग, निर्माण कार्यों की स्वीकृति और मौके पर हुए कार्यों का सत्यापन कराया जाए।
उन्होंने जांच पूरी होने तक नियमानुसार आवश्यक अंतरिम कदम उठाने, संभावित वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाने और पंचायत की वित्तीय व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने का भी अनुरोध किया है।
अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत कत्ती का मामला अब प्रशासनिक जांच की कसौटी पर है। वसूली आदेश, कथित भुगतान, 62 लाख रुपये के आहरण और डीएससी दोबारा सक्रिय किए जाने से जुड़े आरोपों की पुष्टि दस्तावेजों एवं संबंधित अधिकारियों के पक्ष के आधार पर होना आवश्यक है।
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है, भुगतान प्रक्रिया की जांच कराता है या नहीं और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।


