नियमित निगरानी और काउंसलिंग से हाई रिस्क गर्भवती का सुरक्षित प्रसव
मां-बच्ची दोनों स्वस्थ, नन्हीं किलकारी से घर में लौटी खुशहाली
Chhindwara 05 January 2026
छिंदवाड़ा यशो :- जिले में सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के समय पर चिन्हांकन, नियमित निगरानी और विभागीय समन्वय के माध्यम से जच्चा-बच्चा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास परियोजना हर्रई द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक और हाई रिस्क गर्भवती महिला का सफलतापूर्वक सुरक्षित प्रसव कराया गया, जिसमें मां और नवजात बच्ची दोनों पूर्णतः स्वस्थ हैं।
🔹 हाई रिस्क श्रेणी में चिन्हांकित थी गर्भवती महिला
आंगनबाड़ी केंद्र तेंदुखेड़ा अंतर्गत श्रीमती करिश्मा परतेती पति श्री देवेन्द्र परतेती की संभावित प्रसव तिथि 23 जनवरी 2026 निर्धारित थी। गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन कम पाए जाने पर उसे हाई रिस्क गर्भवती की श्रेणी में चिन्हांकित किया गया। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा नियमित गृह भ्रमण, पोषण परामर्श, स्वास्थ्य जांच एवं सतत निगरानी की गई।
🔹 प्रसव पीड़ा बढ़ने पर तत्परता से भर्ती
01 जनवरी की रात्रि लगभग 12 बजे महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रई में भर्ती कराया गया। पूरे दिन प्रसव पीड़ा बने रहने और महिला की स्थिति में सुधार न होने पर मामले की जानकारी महिला बाल विकास पर्यवेक्षक श्रीमती एलिस कुजुर द्वारा परियोजना अधिकारी को दी गई।
🔹 समय पर रेफरल बना जीवन रक्षक
परियोजना अधिकारी द्वारा तत्काल बीएमओ डॉ. रानी वर्मा को अवगत कराया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तर से समन्वय कर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। नजदीक और सुविधाजनक होने के कारण महिला को नरसिंहपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख में महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
🔹 विभागीय समन्वय से मिली सफलता
वर्तमान में मां एवं नवजात दोनों स्वस्थ हैं। यह सफलता कलेक्टर हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के बेहतर आपसी समन्वय, पर्यवेक्षक श्रीमती एलिस कुजुर के मार्गदर्शन, बीएमओ डॉ. रानी वर्मा के त्वरित निर्णय और ग्राम स्तर पर आंगनबाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं द्वारा की गई नियमित मॉनिटरिंग एवं पोषण काउंसलिंग का परिणाम है।
🔹 सुरक्षित मातृत्व अभियान की मिसाल
यह मामला जिले में संचालित सुरक्षित मातृत्व अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन का सशक्त उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि समय पर पहचान, निगरानी और समन्वय से हाई रिस्क गर्भावस्था को भी सुरक्षित बनाया जा सकता है।




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