मध्यप्रदेशसिवनी

कुरई जनसुनवाई बनी भरोसे का मंच, 148 आवेदनों पर हुई सुनवाई

कलेक्टर नेहा मीना ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित निराकरण के निर्देश

कुरई जनसुनवाई 2026 – 148 आवेदनों पर सुनवाई, कलेक्टर नेहा मीना ने दिए त्वरित निराकरण के निर्देश

सिवनी यशो :- आमजन को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय तक भटकना न पड़े और स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल सके, इसी उद्देश्य से विकासखंड स्तर पर आयोजित की जा रही जनसुनवाई लोगों के लिए भरोसे का मंच बन रही है। मंगलवार को कुरई विकासखंड मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना स्वयं उपस्थित रहीं और नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

कुरई जनसुनवाई में ग्रामीणों की समस्याएं सुनतीं कलेक्टर नेहा मीना
कुरई विकासखंड मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान नागरिकों की समस्याएं सुनतीं कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना।

जनसुनवाई में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने राजस्व, पेयजल, विद्युत, सड़क, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य, सामाजिक सुरक्षा एवं पंचायत संबंधी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं। कुल 148 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष प्रकरणों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने कहा कि जनसुनवाई केवल आवेदन लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि प्रत्येक समस्या का प्रभावी एवं स्थायी समाधान सुनिश्चित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक आवेदक को उसके प्रकरण में हुई कार्रवाई की जानकारी दी जाए तथा निराकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि लोगों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो।

जनसुनवाई में विभिन्न विभागों के जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे और नागरिकों को आवश्यक जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रशांत उइके सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने विकासखंड स्तर पर आयोजित इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अब उन्हें अपनी समस्याएं लेकर जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ता और स्थानीय स्तर पर ही अधिकारियों से सीधे संवाद कर समाधान का अवसर मिल रहा है।

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