छपारा में अवैध शराब का कारोबार! सस्ती शराब से मिलावट की आशंका, हादसे से पहले जागे प्रशासन
Seoni, 08 September 2026
सिवनी / छपारा यशो:- सिवनी जिले के छपारा तहसील क्षेत्र में कथित अवैध शराब के कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गांवों की गलियों से लेकर शहर के मोहल्लों और हाईवे किनारे स्थित ढाबों तक शराब आसानी से उपलब्ध होने के आरोप सामने आ रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि कई जगह शराब लाइसेंसी दुकानों की तुलना में कम कीमत पर मिलने की बात कही जा रही है।
ऐसे में सवाल केवल अवैध बिक्री का नहीं, बल्कि
शराब की गुणवत्ता और उसके स्रोत का भी है। यदि बिना अधिकृत व्यवस्था के शराब बिक रही है तो उसकी जांच कौन कर रहा है? कहीं कम कीमत के लालच में लोगों को ऐसी शराब तो नहीं परोसी जा रही, जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध हो?
सागर की घटना के बाद भी सबक नहीं?
प्रदेश के सागर जिले में अवैध शराब से मौतों की घटना सामने आने के बाद अवैध और संदिग्ध शराब को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ऐसी घटनाएं यह चेतावनी देती हैं कि अवैध शराब का कारोबार केवल राजस्व चोरी का मामला नहीं है, बल्कि
लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
छपारा क्षेत्र में भी यदि अवैध रूप से शराब बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं तो प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए।
हादसा होने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि उससे पहले ही अवैध कारोबार की जड़ पर प्रहार किया जाए।
ठेके से सस्ती शराब आखिर आ कहां से रही?
छपारा क्षेत्र में कथित तौर पर लाइसेंसी दुकानों से कम कीमत पर ब्रांडेड शराब उपलब्ध होने के दावे किए जा रहे हैं। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
क्या शराब लाइसेंसी दुकानों के स्टॉक से बाहर निकल रही है?
क्या दूसरे क्षेत्र से शराब लाई जा रही है?
क्या बिना वैध दस्तावेज के शराब का परिवहन हो रहा है?
या फिर किसी स्थान पर अवैध तरीके से शराब तैयार अथवा मिलावट की जा रही है?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन प्रशासन के लिए इनकी जांच करना बेहद जरूरी है।
हाईवे के ढाबे या खुले बार?
छपारा-हाईवे मार्ग पर कुछ ढाबों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर शराब परोसे जाने और बैठाकर शराब पिलाने की शिकायतें चर्चा में हैं। आरोप है कि शाम होते ही कुछ स्थानों पर शराब उपलब्ध होने लगती है और लोग वहीं बैठकर सेवन करते हैं।
यदि किसी ढाबे या अन्य प्रतिष्ठान पर वैध अनुमति के बिना शराब परोसी जा रही है तो यह सीधे तौर पर जांच और कार्रवाई का विषय है। प्रशासन को ऐसे स्थानों पर
अचानक और औचक जांच करनी चाहिए।
गांव-गांव पहुंच रही शराब, होम डिलीवरी का भी आरोप
स्थानीय स्तर पर चारपहिया वाहनों से गांवों और मोहल्लों तक शराब पहुंचाए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यदि यह सच है तो अवैध शराब कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
सबसे गंभीर चिंता युवाओं को लेकर है। जब शराब घर के आसपास और आसानी से उपलब्ध होगी तो नशे की पहुंच बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए यह मामला केवल आबकारी विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
प्रशासन हादसे का इंतजार न करे
छपारा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री को लेकर सामने आ रही शिकायतों की
तत्काल और निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रशासन को लाइसेंसी दुकानों के स्टॉक और बिक्री का मिलान करना चाहिए, संदिग्ध शराब के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच करानी चाहिए और ढाबों तथा गांव-मोहल्लों में अवैध बिक्री की शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
क्योंकि जहरीली शराब की पहचान हादसे के बाद नहीं, उससे पहले होनी चाहिए।
सवाल सीधा है—
क्या प्रशासन छपारा में किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
सागर जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए जिम्मेदार विभाग यदि अभी हरकत में आते हैं तो संभावित खतरे को टाला जा सकता है। जरूरत इस बात की है कि
अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई खबर बनने के बाद नहीं, खबर बनने से पहले हो।
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