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MP में 52,019 शिक्षक पद खाली! नकुलनाथ बोले- नारों और कागजों में सिमट गई शिक्षा व्यवस्था

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Aug 31, 2026 10:19 pm / Post views : 33

MP में 52,019 शिक्षक पद खाली! नकुलनाथ बोले- नारों और कागजों में सिमट गई शिक्षा व्यवस्था
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नकुलनाथ का शिक्षा व्यवस्था पर हमला, MP में 52,019 शिक्षक पद खाली; बजट हिस्सेदारी भी घटी

Chhindwara 31 August 2026 छिंदवाड़ा यशो:-  पूर्व सांसद नकुलनाथ ने देश और मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की शिक्षा व्यवस्था नारों और कागजों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, शिक्षकों की कमी और घटता शिक्षा बजट व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर रहे हैं। नकुलनाथ ने कहा कि जर्जर स्कूल भवन, शिक्षकों की कमी और आवश्यक संसाधनों के अभाव ने शिक्षा के स्तर को अपेक्षित लक्ष्य से काफी पीछे धकेल दिया है। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इस अभियान को पूरी निष्ठा और प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू किया गया होता तो स्थिति अलग होती।

दस साल बाद भी 55 प्रतिशत बालिकाएं ही 9वीं से 12वीं तक पहुंच रहीं : नकुलनाथ

नकुलनाथ ने शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 22 जनवरी 2015 को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत हुई थी। उनके अनुसार, इसके दस वर्ष बाद भी केवल 55 प्रतिशत बालिकाएं 9वीं से 12वीं कक्षा के स्तर तक पहुंच पा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार के प्रयासों और उनकी जमीनी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना था कि सवाल यह है कि सरकार ने केवल नारे दिए या वास्तव में बेटियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए पर्याप्त प्रयास भी किए।

पांच साल में 17,141 सरकारी स्कूल बंद होने का दावा

पूर्व सांसद ने शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में देशभर में 17,141 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। उनके अनुसार, यह औसतन प्रतिदिन नौ से अधिक सरकारी स्कूलों के बंद होने के बराबर है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के बंद होने का सीधा असर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में स्कूलों को मजबूत करने, उनमें सुविधाएं बढ़ाने और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करने की आवश्यकता है।

शिक्षा बजट में लगातार कमी पर उठाए सवाल

नकुलनाथ ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में कुल बजट में शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी 4.6 प्रतिशत से घटकर 2.5 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के प्रति सरकार की प्राथमिकता पर गंभीर सवाल बताते हुए कहा कि केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार को भी शिक्षा के बजट में पर्याप्त वृद्धि करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा किसी भी देश और प्रदेश के भविष्य की बुनियाद है। बजट में कमी का असर स्कूलों की सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता पर दिखाई देता है।

नौवीं तक पहुंचते-पहुंचते सिर्फ 36 प्रतिशत बच्चे गणित हल कर पाते हैं : दावा

नकुलनाथ ने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में कक्षा 9वीं तक आते-आते महज 36 प्रतिशत बच्चे ही गणित के सवाल हल कर पाते हैं। उन्होंने इसके पीछे बच्चों की तुलना में शिक्षकों की कमी और शिक्षकों पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त कार्यों को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना था कि शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य लिए जाने के कारण उनका पर्याप्त समय अध्यापन कार्य में नहीं लग पाता।

मध्यप्रदेश में 52,019 शिक्षक पद रिक्त होने का दावा

पूर्व सांसद ने कहा कि मध्यप्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के 52,019 पद रिक्त हैं। इनमें से 47,122 पद प्रारंभिक स्तर के बताए गए हैं। उनके अनुसार कुल रिक्त पदों में करीब 90 प्रतिशत पद प्राथमिक शिक्षा से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा की नींव ही कमजोर रहेगी तो आगे की कक्षाओं में विद्यार्थियों से बेहतर परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है। प्राथमिक स्तर पर पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहली आवश्यकता है।

‘जहां बच्चे हैं, वहां शिक्षक नहीं और जहां शिक्षक हैं, वहां सुविधाओं का अभाव’

नकुलनाथ ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर समस्याएं दिखाई दे रही हैं। कहीं विद्यार्थी हैं लेकिन पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो कहीं शिक्षक और विद्यार्थी होने के बावजूद स्कूल भवन एवं मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति की समीक्षा कर शिक्षकों के रिक्त पद भरने, स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, शिक्षा बजट बढ़ाने और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की दिशा में गंभीरता से कदम उठाने की मांग की। नकुलनाथ ने कहा कि शिक्षा केवल राजनीतिक नारों का विषय नहीं, बल्कि देश और प्रदेश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। सरकार को आंकड़ों और घोषणाओं से आगे बढ़कर शिक्षा के क्षेत्र में ठोस एवं दिखाई देने वाले सुधार करने होंगे।
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