सिवनी यशो:-प्रदेश सरकार ने मंडी चुनाव की प्रक्रिया दो महीने में प्रारंभ करने की बात उच्च न्यायालय में अपना जबाव प्रस्तुत करते हुये कही है । प्रदेश सरकार को उच्च न्यायालय ने गडारवाड़ा के एक व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया था जिसका जबाव 27 जून को प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को जबाव प्रस्तुत किया है ।
सरकार ने कहा है कि दो सप्ताह में मंडी चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। इसके लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम शुरू कर दिया है। इसके बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति रवि विजय कुमार एवं न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को तय कर दी।
यहाँ बता दें कि मध्यप्रदेश में 2013 में मंडी चुनाव हुए थे जिसका कार्यकाल वर्ष 2017-18 तक था इस समयावधि के पश्चात प्रदेश सरकार को मंडी चुनाव कराना था मंडी अधिनियम के अनुसार अधिकतम चुनाव एक वर्ष तक टाले जा सकते थे परंतु सरकार द्वारा लगातार मंडी चुनाव टाले जाने से 16 नवम्बर 2022 में नागरिक उपभोक्ता मंच के मनीष शर्मा, राजेश शर्मा, गाडरवारा निवासी पवन कौरव, अभिषेक मेहरा, सज्जाद अली, विजय आहूजा की ओर से हाईकोर्ट जबलपुर में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें मध्यप्रदेश में शीघ्र मंडी चुनाव कराने की मांग की थी। इस पर 21 नवंबर 2022 को सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार, मंडी बोर्ड, चुनाव आयोग को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जबाब मांगा था परंतु सरकार तीन चार सुनवाई के बाद भी जब सरकार जबाव नहीं दे सकी तो कोर्ट ने 12 जून को कड़ा रूख अपनाते हुये 10 हजार रूपये की कास्ट लगाई । जिसके बाद बीते 27 जून को हुई सुनवाई में सरकार ने अपनी ओर से हाईकोर्ट ने जबाब पेश करते हुए जानकारी दी कि मतदाता सूची बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। सरकार दो सप्ताह में मंडी के चुनाव की प्रकिया शुरू कर देगी। सरकार की तरफ से इसके लिए दो सप्ताह का समय भी मांगा गया है। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए सरकार के जबाब को रिकार्ड में लेने के निर्देश जारी किए हैं।
याचिकाकर्ताओं की तरफ से इस पूरे मामले में अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी करते हुये तथ्यात्मक दलील देते हुये कहा था कि मंडी अधिनियम की धारा-11 में मंडी समितियों के गठन का प्रावधान है। धारा-13 में मंडी समितियों का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित किया गया है। मंडी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सरकार किसी आपातकालीन या विशेष परिस्थिति में ही कम से कम डेढ़ एवं ज्यादा से ज्यादा साढ़े तीन साल तक ही मंडियों का कार्यकाल बढ़ा सकती है। करीब एक कार्यकाल बीत जाने के बाद भी सरकार मध्यप्रदेश में नए मंडी चुनाव नहीं करा पाई जो अवैधानिक है, चुनाव न कराना मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का हनन है।




