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विश्व पर्यावरण दिवस पर बालाघाट में मियावाकी उपवन का विस्तार, ली जाएगी जल संरक्षण की शपथ

मोती तालाब की पार बनी हरियाली की मिसाल, 875 पौधे हुए विकसित

Balaghat 04 June 2025
बालाघाट यशो:- पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बालाघाट नगरपालिका ने एक उल्लेखनीय पहल करते हुए मोती तालाब की पार को मियावाकी पद्धति से हरा-भरा उपवन बना दिया है। कभी अनुपयोगी रही यह भूमि आज सजीव हरियाली का उदाहरण बनकर सामने आई है। इस वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर न केवल पौधारोपण होगा, बल्कि जल संरक्षण की शपथ भी ली जाएगी।

मियावाकी पद्धति से हरियाली का चमत्कार

जापानी वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित इस पद्धति के तहत, घने वन जैसे उपवन को बहुत कम समय में तैयार किया जा सकता है। नगरपालिका अध्यक्ष भारती सुरजीतसिंह ठाकुर ने बताया कि इस नवाचार का उद्देश्य बालाघाट को हरित नगर के रूप में विकसित करना है। महज एक साल में 875 पौधे 7 से 12 फीट ऊंचे हो चुके हैं।चार चरणों में तैयार हुआ उपवन

नगरपालिका के उद्यान शाखा प्रभारी इंजीनियर प्रभात रहांगडाले ने बताया कि 2024 में मोती तालाब की पार पर मियावाकी पद्धति से रोपण कार्य प्रारंभ हुआ था, जिसमें लगभग 1000 पौधों का रोपण किया गया। चार चरणों में पूरा हुआ यह उपवन आज नगरवासियों के लिए एक आकर्षण और प्रेरणा का केन्द्र बन गया है।

वृहद पौधारोपण की तैयारी

इस वर्षाकाल में मियावाकी उपवन को और सघन किया जाएगा। तालाब की पार पर 400 गड्ढों की खुदाई पहले ही पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही धोबीघाट तालाब, गायखुशी, जागपुरघाट और बजरंगघाट में भी पौधारोपण की योजना बनाई गई है।

पर्यावरण दिवस पर दो प्रमुख आयोजन

सुबह 11 बजे प्रधानमंत्री आवास योजना स्थल (एएचपी साइट बुढ़ी) में 500 से अधिक पौधे रोपे जाएंगे।

शाम 5 बजे, शंकरघाट में “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत नगर प्रमुख, पार्षदगण, स्वयंसेवी संगठन, धर्मगुरु एवं नागरिक जल संरक्षण की शपथ लेंगे और मां बैनगंगा का पूजन करेंगे।

महिलाओं को मिलेगा संरक्षण का जिम्मा

अमृत मित्र योजना के तहत पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी। इससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होगी बल्कि महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता भी मिलेगी।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के संकल्प से प्रेरणा

नपाध्यक्ष भारती ठाकुर ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों से प्रेरणा लेकर ही नगरपालिका बालाघाट ने हरित क्षेत्र निर्माण का संकल्प लिया है। इस अभियान को शासकीय कार्यालयों, रिक्त भूमि और वार्ड क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाएगा।

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