सिवनीमध्यप्रदेश

NH-44 पिंडकापार में बेकाबू ट्रक ने तोड़ी लोहे की रेलिंग, मेडिकल में जा घुसा; बाल-बाल बची लोगों की जान

15 सितंबर को उठी थी बैरिकेडिंग की मांग, 14 अक्टूबर की घटना के बाद प्रशासन और NHAI की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; पिंडकापार बायपास निर्माण की मांग ने फिर पकड़ा जोर

NH-44 पिंडकापार में ट्रक मेडिकल में घुसा, बायपास की मांग तेज

Seoni, 16 October 2026
कुरई/सिवनी यशो:-
 राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के पिंडकापार क्षेत्र में तेज रफ्तार और सुरक्षा इंतजामों की कथित कमी ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 14 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे पिंडकापार बस स्टैंड के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क किनारे खड़े दूसरे ट्रक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि खड़ा ट्रक अनियंत्रित होकर NH-44 की लोहे की रेलिंग तोड़ता हुआ सर्विस रोड पार कर अभिलाष मेडिकल में जा घुसा। गनीमत रही कि इस भयावह हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि बाहर खड़ी एक कार क्षतिग्रस्त हो गई।

अचानक हुए इस हादसे से बस स्टैंड क्षेत्र में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। मेडिकल में ट्रक के घुसने से वहां मौजूद लोगों की जान पर बन आई थी, लेकिन सौभाग्य से एक बड़ी जनहानि टल गई। घटना ने एक बार फिर इस व्यस्त मार्ग पर वाहनों की तेज रफ्तार, सुरक्षा व्यवस्था और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले ही दी गई थी दुर्घटना की आशंका, फिर क्यों नहीं हुई बैरिकेडिंग?

NH-44 पिंडकापार बायपास संघर्ष समिति के सदस्यों के अनुसार, क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए 15 सितंबर को ही सुरक्षा उपायों की मांग उठाई गई थी। समिति का दावा है कि इस संबंध में सांसद श्रीमती भारती पारधी ने कलेक्टर सिवनी को पिंडकापार हाईवे पर बैरिकेडिंग कराने के लिए कहा था।

समिति का आरोप है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो दुर्घटनाओं के खतरे को कम किया जा सकता था। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर समिति ने प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। समिति ने सवाल उठाया है कि जब संभावित खतरे की ओर पहले ही ध्यान आकर्षित कराया जा चुका था, तो सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में देरी क्यों हुई?

हालांकि, पूर्व में दिए गए निर्देशों और उन पर हुई कार्रवाई की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है।

NHAI की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

घटना के बाद कुरई के लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कर्मचारियों से संपर्क कर सहायता और सुरक्षा इंतजामों की मांग की। संघर्ष समिति का आरोप है कि संपर्क करने के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी और NHAI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।

स्थानीय लोगों ने पिंडकापार के इस व्यस्ततम मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद रहने की समस्या को भी दुर्घटनाओं के जोखिम से जोड़ते हुए चिंता जताई है। उनका कहना है कि अंधेरे और तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क किनारे स्थित प्रतिष्ठानों, सर्विस रोड तथा बस स्टैंड क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा गंभीर चुनौती बनी हुई है।

अधिकारियों की समझाइश के बाद खुला जाम

हादसे के बाद आक्रोशित लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार और स्थायी समाधान की मांग उठाई। देर रात तहसीलदार श्री परतेती, नायब तहसीलदार हिमांशु कौशल और थाना प्रभारी कृपाल सिंह तेकाम सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संबंधित परिवारों और लोगों को आश्वासन दिया।

15 अक्टूबर को एसडीएम कुरई ने NHAI के अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कार्रवाई करने की बात कही। अधिकारियों की समझाइश के बाद देर रात दोनों ओर लगा जाम हटाया गया और आवागमन फिर से शुरू हुआ। दुर्घटनाग्रस्त दोनों ट्रकों को भी रात में ही हटाया गया।

तात्कालिक सुरक्षा के साथ बायपास निर्माण की मांग

NH-44 पिंडकापार बायपास संघर्ष समिति ने प्रशासन और NHAI के संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल बैरिकेडिंग, पर्याप्त रोशनी और अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। समिति ने स्पष्ट किया कि केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पिंडकापार बायपास निर्माण के लिए जरूरी प्रक्रिया, कार्यवाही, निर्देश और पत्राचार भी प्राथमिकता से किए जाने चाहिए।

समिति का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बनी दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए अब और देरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन और NHAI को समन्वय बनाकर ऐसा स्थायी समाधान निकालना चाहिए, जिससे कुरई और पिंडकापार के नागरिकों, व्यापारियों तथा हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संभावित दुर्घटना की आशंका जताए जाने के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां समय रहते सुरक्षा इंतजाम करेंगी, या फिर किसी बड़ी जनहानि के बाद ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे?

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