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शिक्षा व्यवस्था में सुधार शिक्षक ही कर सकते है : शिक्षक दिवस विशेष आलेख

वरिष्ठ पत्रकार गोविन्द चौरसिया 

शिक्षा व्यवस्था में सुधार शिक्षक ही कर सकते है : शिक्षक दिवस विशेष आलेख - Seoni News

 शिक्षक को राष्ट्र निर्माता का दर्जा दिया गया है, देश में स्थिति है कि प्राईवेट स्कूलों के शिक्षकों का वेतन कम ज्यादा मेहनत,   सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का वेतन ज्यादा मेहनत कम। 
  आज आम नागरिक अपने बच्चों को सरकारी स्कलों में न पढ़ा कर, प्राईवेट स्कूलों में पढ़ाना  चहाता है, जहां वह अपनी औकात से ज्यादा फीस देता है, महंगी ड्रेस एवं महंगी किताबें खरीदता है। 
  मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एक सी शिक्षा प्राणाली455 लागू कर दी है, इसमें एन.सी.आर.टी.सी की किताबें चलनी चाहिये। किन्तु केन्द्रीय विद्यालयो में एन.सी.आर.टी.सी  की किताबें  चलती है जो सस्ती है और प्राईवेट  स्कूलों में उसी सिलेबस की महंगी किताबें चलती है। देश में एक सी शिक्षा प्रणाली लागू न होने का कारण पिछली सरकारें दोषी है। शिक्षा माफिया पूरी तरह हावी है। 
राज्य एवं केन्द्र सरकारों के सिलेबस अलग-अलग है यह भेदभाव पिछली सरकारों ने पैदा किया है। देश में एक सी शिक्षा प्रणाली होनी चाहिये जिससे पूरी तन्मयता से सरकार  शिक्षा लागू करे तो निश्चित ही प्राईवेट स्कूलों में एडमीशन नहीं होंगे।  पूरे देश में शिक्षकों का वेतन एकसा होना चाहिये, राज्य सरकारें उनसे बेगारी के काम न करवाये। 
कहते है कि वह देश आगे बढता है, जिसकी शिक्षा प्रणाली अच्छी हो, देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, किन्तु सरकारें उन्हें अवसर देने में सक्षम नहीं है। शिक्षक का राष्ट्रीय सोच अच्छा हो तो शिक्षा प्रणाली में सुधार हो सकेगा। 
  सरकारी शिक्षक ईमानदारी से मेहनत करे तो वे अपने प्राईवेट स्कूलों के शिक्षकों का शोषण से बचा सकते है, आज देश में शिक्षा जहां मिशन होना चाहिये वहां व्यवसाय बन गई है। देश में बेराजगारी बढ़ रही है सभी चाहते है कि उसे सरकारी नौकरी मिले तो वह संभव नहीं है, शिक्षा प्रणाली में बदलाव हो कि लोगों का झुकाव सरकारी नौकरी की तरफ न होकर अपने व्यवसाय और पेशे की ओर हो, यह तभी हो सकता है जब सरकारी शिक्षक ईमानदारी से शिक्षा देवें। 
शिक्षक दिवस पर सभी को बधाई ।  

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