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बिजली के नाम पर खुली लूट! सिवनी में किसानों को भारी बिल, आम जनता पर स्मार्ट मीटर का दबाव

मोटर की एचपी बढ़ाकर वसूली के आरोप, “स्मार्ट मीटर नहीं लगवाओ तो बिजली काट देंगे” से दहशत

सिवनी बिजली विभाग विवाद – कंपनियों के बिल नहीं मान रहा विभाग, स्मार्ट मीटर के लिए घर-घर दबाव

Seoni 10 May 2026
सिवनी यशो:– Madhya Pradesh Poorv Kshetra Vidyut Vitaran Company Limited के खिलाफ सिवनी जिले में किसानों और आम उपभोक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर किसानों पर सिंचाई मोटरों की क्षमता बढ़ाकर भारी बिजली बिल थोपने के आरोप लग रहे हैं, तो दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को कथित रूप से जबरन स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव में लिया जा रहा है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि बिजली विभाग और उससे जुड़े ठेकेदार उपभोक्ताओं के साथ मनमानी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभागीय कार्रवाई ने आम जनता, किसानों और छोटे उपभोक्ताओं को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान कर दिया है।

“3 एचपी की मोटर को 10 एचपी बताकर थमाए जा रहे भारी बिल”

किसानों का आरोप है कि वे बाजार से प्रतिष्ठित कंपनियों की 3, 5 या 7 एचपी की सिंचाई मोटर विधिवत बिल के साथ खरीदते हैं, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी उन्हीं मोटरों को 6 एचपी, 8 एचपी या 10 एचपी बताकर अतिरिक्त बिजली बिल जारी कर रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि विभाग मोटर कंपनी के बिल, मोटर पर लगी स्लिप और अधिकृत दस्तावेजों को भी मान्यता नहीं दे रहा। किसानों का कहना है कि विभाग अपने “मापदंड” बताकर कनेक्शन को अवैध घोषित करने और अधिक एचपी के आधार पर वसूली करने में लगा हुआ है।

इस कार्रवाई से अनेक किसान सरकारी सब्सिडी से भी वंचित हो रहे हैं। किसानों का सवाल है कि यदि कंपनियां गलत क्षमता की मोटर बेच रही हैं तो कार्रवाई कंपनियों पर होनी चाहिए, किसानों पर क्यों?

“स्मार्ट मीटर नहीं लगवाया तो लाइन काट देंगे”

जिले में स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर भी हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभागीय अधिकारी और ठेकेदार घर-घर जाकर दबाव बना रहे हैं और स्मार्ट मीटर नहीं लगाने पर बिजली कनेक्शन काटने की धमकी दे रहे हैं।

कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके पुराने मीटर जबरन निकाल दिए गए और स्मार्ट मीटर खंभों पर टांग दिए गए। लोगों का कहना है कि उन्हें कहा जा रहा है कि भविष्य में रीडिंग लेने कोई नहीं आएगा, एवरेज बिल जारी होगा और अंततः स्मार्ट मीटर लगवाना ही पड़ेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि उपभोक्ताओं को सात दिन के भीतर स्मार्ट मीटर लगवाने की चेतावनी दी जा रही है।

सरकार कहती है स्वेच्छा, अधिकारी कर रहे जबरदस्ती”

केंद्र सरकार की ओर से स्पष्ट किया जा चुका है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर पूरी तरह वैकल्पिक हैं और किसी उपभोक्ता को मजबूर नहीं किया जाएगा। Manohar Lal Khattar ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि स्मार्ट मीटर अपनाना उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

इसके बावजूद सिवनी जिले में उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा करने के दबाव में जबरदस्ती कर रहा है।

“जनता पूछ रही — आखिर यह सुधार है या खुली वसूली?”

जिले में लगातार उठ रहे सवालों के बीच लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली अब सेवा से अधिक “वसूली अभियान” जैसी दिखाई देने लगी है। किसानों को बढ़े हुए एचपी के बिल, आम उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर का दबाव और बढ़ते बिजली बिलों ने जनता में असंतोष बढ़ा दिया है।

कई सामाजिक संगठनों और उपभोक्ताओं ने मांग की है कि स्मार्ट मीटर और मोटर एचपी जांच के नाम पर हो रही कथित मनमानी की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा उपभोक्ताओं और किसानों को राहत दी जाए।

विभाग का पक्ष

इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बाजार में उपलब्ध कई मोटरों की वास्तविक बिजली खपत कंपनियों द्वारा बताए गए एचपी से अधिक पाई जा रही है, इसलिए जांच और कार्रवाई की जा रही है। वहीं स्मार्ट मीटर को लेकर विभाग का कहना है कि यह बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में जरूरी कदम है।

Dainikyashonnati

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