“एक साल में कितनी बदली सिवनी?”- विकास के दावे बनाम अधूरे कामों की हकीकत
करोड़ों की योजनाओं, डीजल बचत और अमृत योजना का दावा… लेकिन अधूरे काम, धीमा विकास और जनता की नाराजगी भी चर्चा में
ज्ञानचंद सनोडिया एक वर्ष कार्यकाल पर बहस तेज, उपलब्धियों और आरोपों के बीच घिरी नगर पालिका
Seoni 10 May 2026
सिवनी यशो:- Seoni Municipal Council के कार्यकारी अध्यक्ष Gyanchand Sanodiya के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर नगर राजनीति में उपलब्धियों और आरोपों के बीच बहस तेज हो गई है।
एक ओर नगर पालिका परिषद द्वारा करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं, राजस्व वृद्धि और प्रशासनिक सुधारों का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कई नागरिक विकास कार्यों की धीमी गति, अधूरे प्रोजेक्ट और जनता की परेशानियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
“डीजल में 45 लाख की बचत” और करोड़ों की परियोजनाओं का दावा
नगर पालिका परिषद के अनुसार 8 मई 2025 को अध्यक्ष बनने के बाद ज्ञानचंद सनोडिया ने “सबका साथ, सबका विकास” की नीति के तहत कई प्रशासनिक और विकासात्मक कदम उठाए।
दावा किया गया है कि नगरीय निकाय के वाहनों में जीपीएस मॉनिटरिंग लागू करने से डीजल खर्च में करीब 45.50 लाख रुपये की बचत हुई, जिसे परिषद अपने कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि मान रही है।
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परिषद के अनुसार:
- कम्पनी गार्डन के लिए 226 लाख रुपये,
- 500 मीटर ऑडिटोरियम हेतु 1200 लाख रुपये,
- नगर पालिका कार्यालय भवन निर्माण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति,
- शहर के पार्कों के सौंदर्यीकरण हेतु लगभग 600 लाख रुपये की डीपीआर,
- अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 61 करोड़ रुपये की जल प्रदाय योजना,
- 125 करोड़ रुपये की प्रस्तावित सीवर लाइन योजना,
- 185 लाख रुपये के फायर स्टेशन कार्य
जैसी परियोजनाओं पर कार्यवाही प्रारंभ की गई या स्वीकृतियां प्राप्त की गईं।
नगर पालिका का दावा है कि इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद शहर के बुनियादी ढांचे और सौंदर्यीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
“स्वीकृतियां मिलीं, लेकिन जमीन पर काम कहां?”
दूसरी ओर शहर में यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि जिन परियोजनाओं की घोषणाएं की गईं, उनमें से कई अभी तक धरातल पर क्यों नहीं उतर सकीं।
विशेष रूप से नगर पालिका कार्यालय भवन को लेकर विवाद बना हुआ है। जानकारी के अनुसार शहर के मध्य स्थित महिला वासती गृह परिसर को कार्यालय भवन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना गया था और अधिकांश स्वीकृतियां भी मिल चुकी थीं।
आरोप है कि बाद में भवन को किदवई वार्ड स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन वहां भी निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। विरोधी पक्ष इसे प्रशासनिक निष्क्रियता और राजनीतिक निर्णय बता रहा है।
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मॉडल रोड और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
शहर की प्रमुख मॉडल रोड को लेकर भी लोगों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और कुछ ही समय में सड़क की स्थिति खराब दिखाई देने लगी।
विरोधी पक्ष का आरोप है कि ठेकेदारों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इस संबंध में नगर पालिका की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
“जनता छोटे कामों के लिए भी भटकती रही”
बीते एक वर्ष के दौरान जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन, नामांतरण, खाद्य पर्ची, भवन अनुमति और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों में देरी को लेकर भी आम लोगों में नाराजगी की चर्चाएं रहीं।
कई नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका में प्रशासनिक समन्वय की कमी दिखाई दी, जिससे नियमित सेवाओं का संचालन प्रभावित हुआ।
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शफीक खान के कार्यकाल से तुलना
नगर राजनीति में पूर्व अध्यक्ष Shafeeq Khan के कार्यकाल की तुलना भी लगातार की जा रही है।
लोगों का कहना है कि उनके समय में दलसागर लाइट एंड साउंड फाउंटेन, मठ मंदिर तालाब सौंदर्यीकरण, प्रमुख सड़कों का डामरीकरण, निषाद राज भवन और विभिन्न सामुदायिक भवनों जैसे कार्य तेजी से हुए थे।
इसके विपरीत वर्तमान कार्यकाल में अधिकतर परियोजनाएं कागजों और स्वीकृतियों तक सीमित रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
विधायक से समन्वय की कमी की भी चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि सिवनी विधायक Dinesh Rai Munmun और कार्यकारी अध्यक्ष के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पाया। आरोप हैं कि इसी कारण नगर पालिका को विधायक निधि और निर्माण एजेंसी संबंधी अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका।
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“ढाई सौ कार्य स्वीकृत, लेकिन प्रगति धीमी”
बताया जा रहा है कि तीन परिषद बैठकों में लगभग 250 कार्य स्वीकृत किए गए, लेकिन उनमें से अनेक कार्य अभी तक प्रारंभ नहीं हो सके।
कांग्रेस पार्षदों ने सौतेले व्यवहार के आरोप लगाए हैं, वहीं भाजपा के कुछ पार्षदों के बीच भी असंतोष की चर्चा है कि उनके वार्डों में अपेक्षित विकास कार्य शुरू नहीं हुए।
अब जनता के सामने दो दावे
एक तरफ नगर पालिका परिषद करोड़ों की योजनाओं, राजस्व वृद्धि और प्रशासनिक सुधारों को उपलब्धि बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और नागरिक विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति पर सवाल उठा रहे हैं।
अब शहर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये योजनाएं आने वाले समय में वास्तव में जमीन पर उतरेंगी, या फिर स्वीकृतियों और घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएंगी।



