सिवनी–जबलपुर चोरी कांड: सिवनी में खपा चोरी का सोना, जांच की दिशा बदली या मोड़ी गई?
Seoni 04 February 2026
सिवनी यशो:- जबलपुर के माढ़ोताल थाना क्षेत्र में 15–16 दिसंबर की दरमियानी रात एक पांडे परिवार के यहां हुई करीब 15 लाख रुपये की सनसनीखेज चोरी अब महज चोरी का मामला नहीं रह गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जब उसने चोरी के जेवर सिवनी में खपाने की बात स्वीकार की, तब से यह केस जांच, निष्पक्षता और पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।
चोर बोला, “सिवनी में बेचा माल” — पुलिस सीधे सराफा बाजार पहुंची
प्रज्ञा पांडे की रिपोर्ट पर माढ़ोताल पुलिस ने अपराध क्रमांक 868/25 दर्ज कर जब जांच आगे बढ़ाई, तो आरोपी के कथन ने जांच की दिशा बदल दी। आरोपी के अनुसार चोरी किए गए जेवरात सिवनी में अलग-अलग हाथों में बेचे गए। इसके बाद पुलिस टीम सिवनी पहुंची और सराफा से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों व व्यापारियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू हुई।
पूछताछ, दबिश और उपलब्ध तकनीकी जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई — लेकिन यहीं से मामले ने नया मोड़ ले लिया।

जांच अधिकारी पर पक्षपात के आरोप, निष्पक्षता पर सवाल
जांच आगे बढ़ने से पहले ही पुलिस जांच अधिकारी पर पक्षपात के आरोप सामने आने लगे। आरोप है कि जिन लोगों पर चोरी का माल खरीदने का संदेह है, उनमें से कुछ प्रभावशाली चेहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि एक निर्दोष व्यक्ति को मामले में घसीटने की आशंका जताई जा रही है।
कुछ घटनाक्रम और परिस्थितियां ऐसी बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
जांच अधिकारी का पक्ष: “नोटिस दिए हैं, जांच जारी है”
मामले की जांच कर रहे माढ़ोताल थाना के सहायक उपनिरीक्षक ने बुधवार को दूरभाष पर बातचीत में बताया कि वे स्वयं सिवनी आकर संदिग्ध प्रतिष्ठानों से संबंधित उपलब्ध जानकारियों को देख चुके हैं और कोतवाली पुलिस से सहयोग भी लिया गया है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तीन व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें दो ज्वेलरी कारोबार से जुड़े और एक अन्य व्यापारी शामिल है। हालांकि नोटिस जारी करने के आधार को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

व्यापारिक संगठनों की दखल, एसपी को पत्र
सूत्रों के अनुसार, सिवनी के सराफा एसोसिएशन और चेंबर ऑफ कॉमर्स ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस अधीक्षक को पत्र सौंपा है। पत्र में यह मांग की गई है कि जांच के नाम पर किसी भी निर्दोष व्यापारी को अनावश्यक रूप से परेशान या अपमानित न किया जाए।
हालांकि पत्र की सामग्री और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि मामला अब व्यक्तिगत जांच से आगे बढ़कर व्यापारिक संगठनों की चिंता का विषय बन चुका है।
जांच को लेकर उठते सवाल, बदली रणनीति की चर्चा
मामले से जुड़े कुछ घटनाक्रमों को लेकर यह चर्चा तेज है कि जांच के दौरान रुख और प्राथमिकताएं बदली हुई नजर आ रही हैं। इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहे हैं—
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क्या जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है?
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क्या प्रभावशाली लोगों के दबाव में जांच प्रभावित हो रही है?
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क्या सिवनी में चोरी का माल खपाने वाले नेटवर्क तक पुलिस पहुंच पाएगी?
पहले भी जल चुका है सिस्टम, फिर वही चूक?
यह पहला मौका नहीं है जब पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हों। पूर्व में सिवनी सहित अन्य जिलों में हुए मामलों में लापरवाही और अनियमितताओं के चलते एक दर्जन से अधिक अधिकारी-कर्मचारी जेल तक पहुंच चुके हैं।
ऐसे में यह मामला भी सिस्टम की ईमानदारी की एक और अग्निपरीक्षा माना जा रहा है।
प्रतिष्ठित सराफा बनाम चोरी का माल
सिवनी जिले का सराफा व्यापार वर्षों से अपनी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता है, लेकिन यदि कुछ लोग चोरी के माल के लेन-देन में शामिल पाए जाते हैं, तो उसका असर पूरे व्यापार पर पड़ सकता है।
ईमानदार व्यापारी चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो — ताकि न निर्दोष फंसे और न ही दोषी बच पाए।
अब निगाहें उच्च अधिकारियों पर
अब इस पूरे मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। यदि सभी तथ्यों और उपलब्ध जानकारियों की निष्पक्ष जांच होती है, तो न केवल संदिग्ध व्यापारियों बल्कि जांच में लापरवाही या पक्षपात के आरोप झेल रहे अधिकारियों पर भी कार्रवाई संभव है।
कुल मिलाकर, यह मामला अब सिर्फ चोरी का नहीं रहा —
यह कानून की निष्पक्षता, पुलिस की कार्यप्रणाली और सिस्टम की साख की सीधी परीक्षा बन चुका है।



