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नल-जल योजना में हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार को छिपाने पीएचई विभाग को बंद करने की तैयारी : अजय सिंह

जल जीवन मिशन पर सरकार जारी करे श्वेत पत्र, निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जेल भेजने की मांग

नल जल योजना भ्रष्टाचार, पीएचई विभाग को बंद करने की तैयारी : अजय सिंह

Seoni 25 May 2026
भोपाल यशो:-  मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि गांवों में नल-जल योजना के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की राशि में हुए कथित हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को ही समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के पुनर्गठन और विभिन्न विभागों में विलय की प्रक्रिया के पीछे जल जीवन मिशन में हुए कथित महाघोटाले के सबूत मिटाने की मंशा छिपी हुई है।

“भ्रष्टाचार छिपाने के लिए किया जा रहा विभाग का पुनर्गठन”

जारी बयान में अजय सिंह ने कहा कि सरकार पीएचई विभाग के कुछ हिस्सों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा कुछ हिस्सों को नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग में विलय करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के निर्णय की आड़ में उठाया जा रहा है, जबकि वास्तविक उद्देश्य जल जीवन मिशन में हुए कथित भ्रष्टाचार पर पर्दा डालना है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौखिक सहमति के बाद इस दिशा में कार्यवाही तेज हुई है, लेकिन इससे भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा। बल्कि जवाबदेही और अधिक कमजोर होगी।

“पानी के लिए तरस रही जनता, सरकार को नहीं चिंता”

अजय सिंह ने कहा कि गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में लोग आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जबकि योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

उन्होंने इंदौर में हाल ही में सामने आए जल संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता को सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से दंडवत कर पुलिसकर्मियों से पानी की भीख मांगी, जिसका वीडियो पूरे देश में चर्चा का विषय बना।

“कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर किए गए करोड़ों के भुगतान”

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि कई स्थानों पर कार्य पूर्ण हुए बिना ही कागजों पर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जांच कराने के बजाय सरकार विभाग को ही समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे फाइलों की जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।

“हजार करोड़ की रिश्वतखोरी के आरोपों की हो जांच”

अजय सिंह ने दावा किया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ (ईएनसी) को अपनी ही मंत्री के खिलाफ कथित एक हजार करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी और केंद्रीय फंड में अनियमितताओं की जांच के आदेश देने पड़े थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद भी राज्य सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

“बुंदेलखंड से मालवा तक फर्जीवाड़े के आरोप”

उन्होंने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड, मालवा और महाकौशल सहित प्रदेश के अनेक जिलों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर अनियमितताएं हुई हैं।

अजय सिंह के अनुसार:

  • मुरैना में कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर घटिया पाइप स्वीकृत किए गए।
  • मंदसौर में बिना पर्याप्त जमीनी कार्य के करोड़ों रुपये का भुगतान किए जाने के आरोप सामने आए।
  • कई जिलों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

स्वतंत्र जांच और श्वेत पत्र की मांग

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की कि पीएचई विभाग और जल जीवन मिशन के तहत हुए सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।

उन्होंने सरकार से जल जीवन मिशन पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए कहा कि जनता को बताया जाए:

  • अब तक कितना बजट स्वीकृत हुआ?
  • कितना भुगतान किया गया?
  • कितने गांवों में वास्तव में पेयजल पहुंचा?
  • किन परियोजनाओं का कार्य पूर्ण हुआ और किनका नहीं?

“कांग्रेस जनता के बीच उठाएगी मुद्दा”

अजय सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने कथित महाघोटाले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए व्यापक आंदोलन चलाएगी।

संपादकीय नोट

यह समाचार पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों अथवा शासन स्तर पर होना शेष है।

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